उज्जैन की हवा-पानी में घुल रहा जहर

By AV NEWS

दिवाली बाद भी एक्यूआई का स्तर खराब

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:उज्जैन की हवा-पानी में जहर घुल रहा है। दीपावली पर वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति थी। दीपावली पर्व बीतने के बाद भी हवाएं शुद्ध नहीं हो पाई है। अब भी महाकाल क्षेत्र में एक्यूआई का स्तर 170 पर है जो ठीक नहीं है। इस दीपावली पर पहली बार हवाओं में इतना प्रदूषण हुआ कि प्रदूषण विभाग ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति बताया है। एक वर्ष में प्रदूषण का स्तर 59 एक्यूआर बढ़ा है। जो लगातार बढ़ता जा रहा है।

सामान्य दिनों में यदि महाकाल क्षेत्र का एक्यूआई 170 है तो यह चिंता का विषय है क्योंकि एक्यूआई 0 से 51 तक अच्छा होता है। 51 से 100 तक ठीक कहा जा सकता है जबकि 100 200 के बीच स्थिति ठीक नहीं होती है। वायु में इस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। डॉक्टर्स के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण श्वास रोग के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। सामान्य लोगा में भी सर्दी-खांसी जुकाम का खतरा होता है। पिछले कुछ सालों से महाकाल मंदिर क्षेत्र में वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा हो रहा है। इसका कारण वाहनों की आवाजाही माना जा रहा है।

वायु प्रदूषण से बढ़े खांसी-सर्दी के मरीज

दीपावली के बाद जिला अस्पताल में रोजाना सर्दी खांसी के 500 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं यही स्थिति धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल की भी है। यहां प्रतिदिन 400-500 की संख्या में सर्दी-खांसी से ग्रस्त मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ. जितेंद्र शर्मा के अनुसार पटाखों से हुए वायु प्रदूषण के कारण मरीजों में अस्थमा, एलर्जी जैसी कई समस्याएं सामने आ रही है। जानकारों के मुताबिक पर्यावरण में प्रदूषण बढऩे और मौसम बदलने की वजह से भी काफी बीमारियां हो रही है। विशेष रूप से सर्दी-खांसी और बुखार के मरीज ज्यादा हैं।

पिछले चार दिनों का एक्यूआई

सोमवार- 170

रविवार-164

शनिवार-14

शुक्रवार-143

शिप्रा नदी का प्रदूषण डी ग्रेड मतलब नहाने लायक पानी नहीं

इधर शिप्रा नदी का पानी भी प्रदूषण के डी ग्रेड पर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक शिप्रा नदी में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो गया है। शिप्रा नदी का जल ऑक्सीजन की मात्रा के आधार पर चौथे दर्जे का अर्थात डी ग्रेड का पाया गया है। प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक डॉ एडी संत के मुताबिक जल प्रदूषण की जांच पानी में ऑक्सीजन, घुलनशील और अघुलनशील धातुओं, अम्ल और क्षार की मात्रा के आधार पर की जाती है। सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा बढ़ जाने पर नदी का पानी गहरे हरे रंग से काला हो जाता है। ए और बी ग्रेड पर नदी के पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है। सी ग्रेड पर पानी को नहाने योग्य माना जा सकता है लेकिन डी ग्रेड पर पानी नहाने लायक भी नहीं होता।

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