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उज्जैन : Left- Right के नियम को व्यापारियों ने बताया Wrong

अनलॉक के नियमों को लेकर व्यापारी असहमत

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बोले : समय कम कर रोज व्यापार की दें अनुमति

आज पहला दिन..गाइड लाइन 15 जून तक लागू…

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उज्जैन। लेफ्ट-राइट नियम की विसंगतियों को लेकर पहले ही दिन शहर के व्यापारी असहमत दिखे। लगभग सभी ने इस व्यवस्था का एक सुर में विरोध किया। वहीं क्राइसिस मैनेजमेंट कमिटी पर व्यापारियों के सुझाव ना सुनने का भी आरोप लगाया। अक्षरविश्व ने आज इसी विषय को लेकर शहर के अलग-अलग व्यापार से जुड़े लोगों और उनकी एसोसिएशन के पदाधिकारियों से चर्चा की।

रेस्टोरेंट संचालकों में भ्रम, क्या 50 प्रतिशत क्षमता से रोज़ संचालन कर सकते हैं ?

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जैसे ही लेफ्ट राइट नियम की गाइडलाइन जारी रेस्टोरेंट संचालक एक दूसरे से फ़ोन पर पूछते रहे की क्या हम 50 प्रतिशत क्षमता से रोजाना अपना व्यवसाय कर सकते हैं या 50 प्रतिशत क्षमता से लेफ्ट-राइट के आधार पर ही संचालन होगा? रेस्टोरेंट संचालकों का यह भी सवाल था की जब ई-कॉमर्स सेवाओं की डिलिवरी रोज की जा सकती है तो हमारे खाद्य पदार्थों की रोज होम डिलिवरी की अनुमति भी हो। सुबह 6 से शाम 6 बजे तक बाजार खुलने पर रेस्टोरेंट संचालकों में रोष है। सभी का कहना है की हमारी ग्राहकी का समय ही शाम को 6 बजे के बाद शुरू होता है जब सभी अपने काम से फ्री हो जाते हैं ऐसे में सुबह 6 से शाम 6 बजे तक की अनुमति मिलना अनुमति ना मिलने के सामान ही है।

मुख्य सड़कों पर तो हो गया लेफ्ट-राइट, गलियों के प्रतिष्ठानों का क्या?

शहर की लगभग हर कॉलोनी में गलियों में भी कई प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। सिर्फ किराना-दूध की दुकान ही नहीं गलियों में सेनेटरी, हार्डवेयर, पेंट, सलून यहां तक की रेस्टोरेंट्स भी हैं। इन प्रतिष्ठानों के लिए क्या गाइड लाइन है इसे लेकर असमंजस की स्थिति है जिसके चलते सब अपने हिसाब से दुकानों का संचालन कर रहे हैं।

ब्यूटी पार्लर संचालकों के सवाल
एक और शादियों की अनुमति है वहीं दूसरी और ब्यूटी पार्लर को लेफ्ट-राइट नियम से खोला जाना है। ऐसे में चर्चा में शहर की एक प्रतिष्ठित ब्यूटी पार्लर संचालिका ने सवाल उठाया की दुल्हन की शादी वाले दिन हमारे पार्लर खोलने का टर्न नहीं है उस दिन हम क्या करें? हमारा व्यवसाय वैसे भी घरों और कमर्शियल बिल्डिंग्स में संचालित होता है जहां लोग पूर्व अपॉइंटमेंट लेकर ही आते हैं। ऐसे में हमारे यहां भीड़ लगने का सवाल ही नहीं उठता। यदि प्रशासन चाहे तो किसी भी समय आकर अकास्मिक जांच भी करा सकता है।

शहर में यह भी चर्चा… जनप्रतिनिधियों की खींचतान में व्यापारियों का नुकसान…

दबी जुबान में शहर के व्यापारी वर्ग में यह चर्चा भी जोरों से हैं की स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच लम्बे समय से चली आ रही खींचतान का खामियाजा हम व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। बैठकों में कोई एक जनप्रतिनिधि सुझाव रखते हैं तो उसका दूसरे विरोध में आ जाते हैं। जिससे व्यापारी की बात धरी की धरी रह जाती है। जनप्रतिनिधि एक मत हो कर हमारी समस्याओं को सुने तो एक मजबूत हल निकल सकता है जिससे व्यापारियों का नुकसान भी नहीं होगा और कोरोना के नियमों का पालन भी हो जाएगा।

व्यापारियों के अनुरोध के बाद भी जिला प्रशासन पूरा बाजार खोलने के लिए नहीं माना। व्यापारी एसोसिएशन प्रशासन के निर्णय से असहमत हैं। एक ओर की दुकान खोलना और दूसरी ओर कि बंद रखना तर्कसंगत नहीं है। ग्राहक को जिस दुकान से समान लेना होता है वह उसी दुकान से लेता है, उसके बाद भी एक पट्टी में ज्यादा भीड़ एकत्रित होगी। अगर यह पूरा बाजार खुल जाएगा तो दोनों और भीड़ डिवाइड हो जाएगी। हालांकि बृहस्पति भवन में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित व्यापारियों की बैठक में भी सभी व्यापारियों ने इस निर्णय पर अपनी असहमति जताई थी। व्यापारियों ने अनुरोध किया था कि वह पूरा बाजार खोलें चाहे दुकान खोलने का समय सीमित कर दें। किंतु जिला प्रशासन ने मध्यप्रदेश शासन और केंद्र शासन के नियमों का हवाला देकर पूरा बाजार खोलने पर असहमति व्यक्त कर दी।
– विजय अग्रवाल, अध्यक्ष नईपेठ व्यापारी एसोसिएशन

हम इस निर्णय से असहमत है। पूरा बाजार खोलना चाहिए। अधूरा बाजार खुलने से ग्राहक -व्यापारी और प्रशासन सभी को दिक्कत होगी।– संजय मेहता, अध्यक्ष सराफा व्यापारी एसोसिएशन

जिस तरह से जिला प्रशासन ने व्यापारियों की नहीं सुनी उनके सुझाव को भी नहीं माना और केवल अपना निर्णय थोप दिया हम इस निर्णय से पूर्णतया सहमत हैं। हमारा विरोध है।– तुलसीदास राघवानी, गोपाल मंदिर व्यापारी एसोसिएशन

जिला प्रशासन के एक और की दुकान खोलने के निर्णय गलत है और प्रशासन पुनर्विचार करें। हमने जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा की है किंतु कोई सकारात्मक जवाब इस विषय में हमको नहीं मिल पाया।– महेश पायलवाला, अध्यक्ष, लखेरवाड़ी व्यापारी संघ

एक-एक पट्टी प्रतिदिन खोलने का निर्णय गलत है और हम इस निर्णय से अत्यधिक नाराज हैं। पूरा बाजार खुलना चाहिए व्यापारियों के विवाद होंगे प्रशासन व्यापारियों के चालान बनाएगा और कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।– वरुण शर्मा, अध्यक्ष, बंबाखाना व्यापारी एसोसिएशन

हम इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं प्रशासन को पूरा बाजार खोलना चाहिए।– विमल पगारिया, सतीगेट व्यापारी एसोसिएशन

मिठाई विक्रेता बोले-माल बनाने और बेचने में ही चाहिए कम से कम दो दिन

हमारी अधिकांश मिठाइयां दूध से बनती है जिनके प्रोडक्शन में एक दिन का समय लग जाता है और उस मिठाई को अगले दिन बेचना अनिवार्य होता है। ऐसे में एक दिन छोड़ कर एक दिन दुकान खोलना और माल बनाना लगभग असंभव है। इससे बेहतर है की प्रशासन सीमित समय के लिए रोज दुकान खोलने की अनुमति दें। जिससे प्रोडक्शन साइकिल प्रभावित ना हो। हम गांव के किसान से दूध मंगवाते हैं, उसमें भी बहुत सी प्रैक्टिकल प्रोब्लम है। 1 दिन दूध मंगवाना, फिर दूसरे दिन उसे मना करना, किसान भी परेशान होगा। किसानों और दूध व्यवसाय से सीधे तौर पर जुड़े होने के कारण महाराष्ट्र, गुजरात एवं अन्य राज्यों में हमारे व्यापार को आवश्यक वस्तुओं में जोड़ा है।

जो निर्णय लिए गए उससे स्पष्ट है आने वाले दिनों में विवाद होंगे। व्यापारी अपना आधा शटर खोल के व्यापार भी करते हैं ऐसी स्थिति में उन्हें नगर निगम पुलिस से विवाद की स्थिति निर्मित होगी। यह भी स्पष्ट है कि शहर के प्रत्येक ग्राहक की दुकान नियत है वह नहीं समझ पाता है लेफ्ट-राइट में कौन-सी दुकान खुलेगी वह घर से निकलता है परंतु दुकान बंद होने पर दूसरी दुकान पर आएगा। ऐसी स्थिति में बाजार में भीड़ बढ़ेगी इसलिए समस्त दुकानों को खोलने का निर्णय करना चाहिए। वैसे भी सुबह 6 से शाम 6 तक का समय पर्याप्त है ऐसी स्थिति में भीड़ नहीं होगी। जिला क्राइसिस मैनेजमेंट समिति अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। -रवि राय, कार्यकारी अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी उज्जैन

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