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कभी बुलंदी थी पहचान… अब ‘ऊंची इमारतों’ पर खतरे का निशान

सियासत के रंग भी गजब है। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा की राष्ट्रीय चक्की जिस महीनता से राजनीति को पीस रही है, उससे दावेदार तो दूर राजनीति के स्थापित नामों के चेहरों का भी रंग उड़ा हुआ है। मालवा-निमाड़ की फिलहाल जो टिकट घोषित हुए हैं, उससे यह तो साफ हो गया है कि केंद्रीय नेतृत्व बहुत बारीकी से हर एक पहलू देखकर ही टिकट दे रहा है। अब निगाहें वर्तमान प्रदेश सरकार के मंत्रियों पर हैं।

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उन्हें दो चिंताएं सता रही हैं। पहली यह कि यदि वे अपनी सीट पर मजबूत स्थिति में हुए तो भी यह निर्देश आ सकता है कि उनकी सीट से तो कोई भी जीत जाएगा इसलिए वे किसी ऐसी सीट से चुनाव लड़ें, जहां भाजपा की स्थिति सर्वे में कमजोर मिली हो। दूसरी यह कि सर्वे में यदि नंबर कम मिले तो टिकट के ही लाले पड़ जाएंगे। इसके बाद से ही सूबे की सियासत की ये बुलंद इमारतें अब खतरे के निशान का सामना कर रही हैं।

कड़े तेवर भारी पड़ गए

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कभी उज्जैन में पदस्थ रहे निमाड़ के एक जिले के पुलिस अधीक्षक का तबादला भोपाल कर दिया गया। 6 महीने पहले ही इन्होंने पुलिस कप्तान के रूप में जिले की कमान संभाली थी। इतनी जल्दी हुआ यह तबादला पुलिस महकमे में चर्चा में बना हुआ है। बताते है कि एसपी ने निमाड़ के अपनी पदस्थी के जिले में राजनीतिक रसूख वाले करीब एक दर्जन बदमाशों को चिह्नित कर आचार संहिता में उन पर पाबंदी लगाने की रणनीति बनाई थी। इस बात की भनक लगते ही रसूखदार नेताओं ने दिल्ली के नेताओं से संपर्क कर पुलिस कप्तान का ट्रांसफर करवा दिया। तेज स्वभाव के पुलिस कप्तान ने भी देर किए बिना जैसे ही आदेश मिला वैसे ही एडिशनल एसपी को चार्ज देकर जिले चल दिए।

जिनके भरोसे थे वे ही प्रत्याशी बन गए

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विधानसभा के लिए भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशियों सूची का अधिकांश हिस्सा तो प्रौढ़ और वरिष्ठ नेताओं को समर्पित हो गया। अब बची सूची में क्या युवा व नए चेहरे सामने आएंगे? क्या पार्टी शेष बचे उम्मीदवारों के जरिये भाजपा पीढ़ी परिवर्तन का आगाज़ कर सकती हैं? यह सवाल उन युवाओं के मन है,जो बड़े जतन से पार्टी का काम कर टिकट की उम्मीद लगाए बैठे है।

अनेक युवाओं ने तो जमावट भी शुरू कर दी थी। विश्वास था कि उनके गॉडफादर का आर्शीवाद उन्हें मिल जाएगा। अब दिक्कत यह है कि पार्टी ने गॉडफादर को ही मैदान में उतार दिया है। हालांकि पार्टी में यह भी चर्चा है कि केंद्रीय संगठन ऐसे नए चेहरों को उतारने का मन बना चुका है,जो मिशन 2024 में भी मददगार हो। बस शर्त एक ही- नेताओ की सिफारिश नही, जीत की 100 प्रतिशत ग्यारंटी। उज्जैन जिले की शेष बची 4 विधानसभा सीट पर नए चेहरे दस्तक दे रहें हैं।

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