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कामदा एकादशी व्रत कल, पूजा का मुहूर्त और विधि

8 अप्रैल को कामदा एकादशी है. यह पर्व पूर्ण रूप से जगत के पालनहार श्री कृष्ण को समर्पित है. इस दिन भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस दिन विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं साथ ही, जीवन में आने वाली सभी बाधाएं भी दूर होती हैं. इस बार कामदा एकादशी का व्रत दोगुना फलदायी होगा क्योंकि कई मंगलकारी योग का संयोग बन रहा है. इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी.

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कामदा एकादशी व्रत का महत्व
कामदा एकादशी का व्रत सांसारिक सुखों और कामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष माना गया है। यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष रूप से शुभ है जो संतान सुख, विवाह में सफलता, प्रेम संबंधों में मधुरता और वैवाहिक जीवन में संतुलन की कामना करते हैं। साथ ही, इस व्रत से पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट होते हैं और आत्मा को शुद्धि की दिशा में मार्गदर्शन मिलता है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

पूजा विधि
कामदा एकादशी के दिन व्रती को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। पीले पुष्प, चंदन, धूप-दीप, तुलसी दल, फल और नैवेद्य से भगवान विष्णु का पूजन करें। विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। पूरे दिन व्रत रखें, यदि निर्जल व्रत संभव न हो तो फलाहार लें। रात्रि को विष्णु भजन, कीर्तन और जागरण करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र अथवा दक्षिणा दान देकर व्रत का पारण करें।

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पौराणिक कथा
पद्म पुराण में कामदा एकादशी की एक पौराणिक कथा का उल्लेख मिलता है। प्राचीनकाल में रत्नपुर नामक नगर में ललित नामक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहते थे। ललित बहुत अच्छा गायक था और राजा के दरबार में संगीत प्रस्तुत करता था। एक दिन दरबार में गाते हुए उसकी स्मृति अपनी पत्नी की ओर चली गई, जिससे वह स्वर-लय में चूक गया। इससे नाराज होकर राजा ने उसे राक्षस योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। यह देखकर उसकी पत्नी ललिता अत्यंत दुखी हुई और उसे अपने पति को श्राप से मुक्त करने का उपाय नहीं सूझ रहा था। तब वह श्रृंगी ऋषि के पास गई और उनसे समाधान पूछा। ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन कामदा एकादशी व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत किया और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने ललित को श्राप से मुक्त कर दिया। यह कथा दर्शाती है कि इस एकादशी का व्रत कितना प्रभावशाली और कल्याणकारी होता है।

एकादशी व्रत के सरल उपाय

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दान करें: ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, एकादशी पर जरूरतमंदों को दान करना अधिक फलदायी है. कहा जाता है जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है. यानी, जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान और अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है.

विष्णु सहस्त्र पढ़ें: एकादशी के दिन दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें. विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो 10 माला गुरुमंत्र का जप कर लें. वहीं, अगर घर में झगड़े होते हैं, तो वे शांत हों जाएं ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें. ऐसा करने से घर के झगड़े शांत हो जाते हैं.

कामदा एकादशी 2025 पारण का समय
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में कामदा एकादशी का पारण बुधवार, 9 अप्रैल को किया जाएगा। इस दिन व्रत पारण के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 02 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक है। इस मुहूर्त के बीच आप कभी भी व्रत का पारण कर सकते हैं।

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