काशी मॉडल लागू होते ही बदल जाएगी श्री महाकालेश्वर मंदिर की दर्शन व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ के पहले अभेद्य सुरक्षा और बेहतर क्राउड मैनेजमेंट चाहते हैं मंदिर में
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe
हरिओम रॉय उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्थाएं अब और भी हाईटेक और सुगम होने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में मंगलवार को एक ऐतिहासिक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत महाकाल मंदिर में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर मॉडल को अपनाया जाएगा।
समझौता ज्ञापन पर काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण और श्री महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के बीच हस्ताक्षर हुए। इस दौरान उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। समझौते के तहत काशी प्राधिकरण महाकाल मंदिर के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा, जो पूरी तरह से परिस्थिति और सफल मॉडल पर आधारित होगी।
इसके पीछे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि प्रयागराज कुंभ के अनुभवों और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से ठोस योजना तैयार हो सके। जिससे बाबा महाकाल के दरबार में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुगम और सुखद यात्रा का अनुभव हो।
क्या है काशी मॉडल और कैसे बदलेगी व्यवस्था?
क्षेत्र-आधारित नियंत्रण- पूरे मंदिर परिसर को अलग-अलग ज़ोन में बाँटा जाएगा ताकि भीड़ का दबाव एक जगह न रहे।
टोकन और स्लॉट सिस्टम- श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए निर्धारित समय (स्लॉट) दिया जाएगा, जिससे लंबी लाइनों से मुक्ति मिलेगी।
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग- पूरे परिसर की चौबीसों घंटे आधुनिक सीसीटीवी कैमरों से लाइव निगरानी होगी।
डिजिटल प्रबंधन- ऐप और डेटा-आधारित मैनेजमेंट के जरिए हर श्रद्धालु की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा।
जानिए महाकाल और काशी विश्वनाथ मंदिर की दर्शन व्यवस्था
1. सामान्य दर्शन-काशी विश्वनाथ मंदिर में चार गेट (1 से 4) से सामान्य श्रद्धालुओं की कतार लगती है। जो अंदर परिसर में दो कतार में बदलती है और दो द्वारों से भगवाल विश्वनाथ के दर्शन होते हैं। महाकाल मंदिर में वर्तमान में सिर्फ मानसरोवर गेट से प्रवेश होता है।
आगे क्या- अगली व्यवस्था में संभवत: यहां से भी मानसरोवर के अलावा गेट नंबर 1, 2 और 4 से सामान्य दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया जाए।
2. सशुल्क दर्शन – काशी विश्वनाथ में पहले से सशुल्क दर्शन बुक किया जा सकता है। सशुल्क सुविधा प्राप्त दर्शनार्थी मंदिर कर्मचारी के सहयोग से अंदर प्रवेश कर परिसर में सामान्य दर्शनार्थियों के साथ जाकर दर्शन करता है। श्री महाकाल मंदिर में भी यही व्यवस्था है। यहां बेरिकेड्स की पहली कतार से दर्शन होते हैं।
3. प्रोटोकाल दर्शन- काशी विश्वनाथ में प्रोटोकाल दर्शनार्थी अपनी सुविधानुसार तय वक्त के बीच ही दर्शन कर सकता है। इन्हें अंदर कोई विशेष सुविधा नहीं होती। मंदिर कर्मचारी इन्हें अंदर प्रवेश कराकर सशुल्क दर्शनार्थी की कतार से दर्शन कराता है। जबकि महाकाल मंदिर में प्रोटोकाल प्राप्त दर्शनार्थी को अलग-अलग जगह से दर्शन कराए जाते हैं जो विवाद की वजह बनता है। बेरिकेट्स की पहली कतार, नंदी हाल के बेरिकेट्स, नंदी भगवान के समीप या फिर गर्भगृह की दहलीज से दर्शन कराए जाने के कारण व्यवस्था बिगड़ती है और विवाद होते हैं।
आगे क्या-संभावना है प्रोटोकाल दर्शन अब एक व्यवस्था से ही हों।
4. वीआईपी दर्शन- वीआईपी व वीवीआईपी दर्शन काशी विश्वनाथ में भगवान के शेड्यूल के मुताबिक दर्शन होते हैं। यानी गर्भगृह में प्रवेश के वक्त अंदर से और शेष वक्त बाहर से दर्शन होते हैं। आम दर्शनार्थियों की दर्शन व्यवस्था प्रभावित नहीं होती। जबकि महाकाल मंदिर में गर्भगृह में प्रवेश संबंधी कोई नियम नहीं है। इस कारण वीआईपी परिजन व मित्रों सहित गर्भगृह में पहुंचते हैं। कई बार दर्शन व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
व्यवस्था बनाने में सुरक्षा एजेंसी का महत्वपूर्ण रोल
श्री काशी विश्वनाथ में मंदिर की सुरक्षा सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) संभालती है। सहयोग के लिए आउटसोर्स कर्मचारी है। सुरक्षा व्यवस्था में मंदिर स्टॉफ, पंडे-पुजारी, मीडिया या फिर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का भी हस्तक्षेप नहीं होता। दर्शन के लिए प्रवेश सभी को व्यवस्था के तहत ही करना होता है। महाकाल मंदिर में इस बात का अभाव है। सुरक्षा व्यवस्था निजी हाथों में है और स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासन, पंडे-पुजारी आदि सभी का खुला हस्तक्षेप है। ऐसे में चाहकर भी बेहतर व्यवस्था नहीं हो पाती।









