चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से : राशि अनुसार मां की आराधना करने का विशेष महत्व

कुंभ-तुला के लिए कालरात्रि, कन्या और मकर के लिए कात्यायनी को पूजना श्रेष्ठ
52 साल बाद 19 को तिथि क्षय में शुरू होगी नवरात्र
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से विशेष ज्योतिषीय संयोगों के साथ शुरू होगी। 52 साल बाद ऐसा योग बन रहा है, जब नवरात्रि के पहले दिन तिथि क्षय की स्थिति रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे तक अमावस्या रहेगी, इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी, जो अगले दिन तड़के 4:52 बजे समाप्त हो जाएगी। दोनों दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा नहीं होने से इसे ज्योतिष में तिथि क्षय कहा जाता है, इसलिए नवरात्रि 19 मार्च से ही मानी जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्रि गुरुवार से शुरू होने के कारण माता दुर्गा का आगमन पालकी पर माना गया है, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। नवरात्रि के साथ ही हिन्दू नववर्ष नव संवत्सर 2083 की भी शुरुआत होगी। 27 मार्च को रामनवमी मनाई जाएगी।
ग्रहों की बाधाएं कम होंगी
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। यदि श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार देवी के स्वरूप की आराधना करते हैं तो साधना का प्रभाव अधिक बढ़ता है और ग्रहों से जुड़ी बाधाएं भी कम होती हैं।
राशि अनुसार देवी आराधना
मेष मां शैलपुत्री
वृषभ मां ब्रह्मचारिणी
मिथुन मां चंद्रघंटा
कर्क मां कूष्मांडा
सिंह मां स्कंदमाता
कन्या मां कात्यायनी
तुला मां कालरात्रि
वृश्चिक मां महागौरी
धनु मां सिद्धिदात्री
मकर मां कात्यायनी
कुंभ मां कालरात्रि
मीन मां महागौरी
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