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दिन-रात के तापमान में 17.5 डिग्री का अंतर, वायरल के मरीज बढ़े

उज्जैन। मौसम की आंखमिचौली ने शहर में वायरल के मरीज बढ़ा दिए हैं। दिन और रात के तापमान में १७.५ डिग्री का अंतर इसका बड़ा कारण है। हाल यह है कि सुबह और रात के समय सर्दी है तो दिन में गर्मी। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। फरवरी का महीना मौसम के हिसाब से इस बार परेशानी वाला रहा। तेज सर्दी, तेज गर्मी और फिर बारिश के बाद रविवार को मौसम पूरी तरह साफ रहा। हालांकि सोमवार की सुबह फिर से बादल छा गए।

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दिन का तापमान 31 डिग्री पार

आसमान साफ होने का सबसे बड़ा असर दिन के तापमान पर हुआ। शुक्रवार को पारा 2३.५ डिग्री पर रहा, जबकि दिन का तापमान रविवार को बढक़र 31.5 डिग्री पर पहुंच गया। तीन दिन में दिन के तापमान में ८ डिग्री की बढ़ोतरी गर्मी का अहसास करवा रही है। हालांकि, रात के तापमान में कमी आई है और सोमवार सुबह यह रविवार के 1६.५ डिग्री से घटकर सोमवार को १५ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

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ठंड, गर्मी और बारिश का महीना

फरवरी ने तीनों मौसम का अहसास करवाया। इस महीने में दिन के वक्त कंपकंपाने वाली ठंड भी रही। विक्षोभ की वजह से तेज गर्मी का अहसास हुआ और बादल गरजे और बरसे भी। जिले में तो ओलावृष्टि भी हुई। मौसम विभाग का मानना है कि प्रभावित करने वाले विक्षोभ एकदम से खत्म नहीं होते। मार्च में भी इनके आने का सिलसिला जारी रहेगा। इसका मतलब यह है कि मार्च में भी धूप को प्रभावित करने वाले सिस्टम आते रहेंगे।

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देरी से आया मावठा, फसलों को प्रभावित किया

आमतौर पर जनवरी में गेहूं के लिए उपयोगी मावठा गिर जाता है लेकिन इस बार 18 से 21 फरवरी के बीच पानी बरसा। जिन किसानों ने जल्दी बोवनी कर दी थी, उनकी फसल पकने के करीब पहुंच गई है। ऐसे में इस बारिश से फसल खेतों में आड़ी पड़ गई है। गेहूं को नुकसान हुआ। वहीं जिन्होंने देर से बोवनी की थी, उनके लिए बारिश फायदेमंद रही।

इधर, मौसम में उठापटक का असर आम आदमी के स्वास्थ्य पर भी नजर आ रहा है। चरक भवन में वायरल, सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना यहां ओपीडी में १५०० से ज्यादा मरीज इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। ओपीडी के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में ३०२७५ लोग उपचार कराने पहुंचे। यहां डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ है। हाल यह है कि डॉक्टर कम पड़ रहे हैं।

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