मंगलनाथ क्षेत्र में 25 एकड़ में हेल्थ टूरिज्म का नया केंद्र बनेगा उज्जैन

ऐसा होगा सीएम के सपनों का उज्जैन का आयुर्वेद एम्स
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उज्जैन। उज्जैन अब मेडिसिटी के साथ-साथ आयुर्वेद का भी बड़ा केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के तीसरे अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) को उज्जैन में स्थापित करने की घोषणा की है। दिल्ली और गोवा के बाद यह आयुर्वेद का तीसरा एम्स होगा। उज्जैन में केंद्रीय संस्थान आने से यहां न सिर्फ चिकित्सा सेवा बेहतर होगी बल्कि आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उज्जैन में अगर यह संस्थान शुरू होता है तो भविष्य में हेल्थ टूरिज्म सिटी स्थापित करने में यह मील का पत्थर साबित होगा। दरअसल, एम्स के लिए करीब 25 एकड़ जमीन की जरूरत है। धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेपी चौरसिया के अनुसार मंगलनाथ क्षेत्र में कॉलेज के पास काफी जमीन है। कॉलेज के पास यहां अपनी करीब 5 एकड़ जमीन है। ऐसे में 20 एकड़ जमीन जमीन खरीद कर या अधिगृहित कर काम शुरू किया जा सकता है।
सीएम की बरसों की मेहनत लाई रंग
उज्जैन में आयुर्वेद एम्स की लंबे समय से मांग की जा रही थी। डॉ. मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए इसके लिए प्रयास शुरू किए थे, जिसे बाद में सांसद अनिल फिरोजिया ने केंद्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया। केंद्र सरकार के इस फैसले से अब अवंतिका नगरी आयुर्वेद चिकित्सा के वैश्विक मानचित्र पर चमकने को तैयार है।
खासियत : 500 बिस्तर का अस्पताल और 100 सीटों का कॉलेज
प्रस्तावित संस्थान न केवल उपचार, बल्कि शिक्षा का भी बड़ा केंद्र बनेगा।
मरीजों की सभी प्रकार की जांचें और उच्च गुणवत्ता वाला उपचार और दवाएं पूरी तरह मुफ्त मिलेंगी।
एम्स के पैरामीटर में 500 बिस्तरों का अस्पताल जरूरी है। ऐसे में अगर यह अस्पताल खुलता है तो आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से लोग उपचार करा सकेंगे।
संस्थान में 100 सीटों वाला आयुर्वेद कॉलेज होगा, जहां यूजी (बीएएमएस) के साथ-साथ सभी विषयों में पीजी (एमडी-एमएस) की सुविधा मिलेगी। वर्तमान में धन्वंतरि कॉलेज में सीमित सीटें ही उपलब्ध हैं।
उज्जैन में बन रही मेडिसिटी और अब इस संस्थान के आने से यहां चिकित्सा पर्यटन बढ़ेगा।









