महाकाल मंदिर में 2 मार्च को होलिका दहन, 4 से बदल जाएगी बाबा की दिनचर्या, गर्मी में ठंडे जल से करेंगे स्नान

संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में होगा होलिका दहन, भस्मार्ती में अबीर-गुलाल से सराबोर होंगे ज्योतिर्लिंग
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के आंगन में 2 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा। मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा पर प्रदोष काल में होलिका का पूजन और दहन किया जाएगा। 3 मार्च को धुलेंडी होगी और 4 मार्च से भगवान महाकाल की दिनचर्या बदल जाएगी। वे ठंडे जल से स्नान करेंगे, साथ ही आरती का भी समय बदल जाएगा।
इस वर्ष 3 मार्च को धुलेंडी के अवसर पर तड़के होने वाली भस्म आरती में राजाधिराज महाकाल भक्तों के साथ अबीर और गुलाल से होली खेलेंगे। मंदिर प्रबंध समिति और पुजारी परिवार ने इस भव्य रंगोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। परंपरा के अनुसार, महाकाल मंदिर परिसर स्थित श्री ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका तैयार की जाएगी। 2 मार्च की शाम को सबसे पहले पुजारी परिवार की महिलाएं विधि-विधान से होलिका का पूजन करेंगी। इसके पश्चात भगवान महाकाल की संध्या आरती संपन्न होने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुजारी द्वारा होलिका का दहन किया जाएगा।
4 में से तीन आरतियों के समय बदलेगा, शरद पूर्णिमा तक रहेगा
ऋ तु परिवर्तन के साथ ही महाकाल मंदिर पूजन परंपराओं में भी बदलाव होने जा रहा है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा यानी 4 मार्च से अवंतिकानाथ की दिनचर्या गर्मी के अनुकूल हो जाएगी। अब तक शीतकाल के कारण गर्म जल से स्नान कर रहे बाबा महाकाल को अब शीतल जल अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच प्रमुख आरतियों में से तीन के समय में भी बदलाव किया जाएगा।
महाकाल मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार, साल में दो बार भगवान की सेवा-पूजा का क्रम बदलता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक (शीतकाल) भगवान की दिनचर्या सर्दी के अनुसार रहती है। होली के अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से ग्रीष्मकाल की शुरुआत मानी जाती है, जो शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहती है।
3 मार्च को भस्म आरती में उड़ेगा अबीर-गुलाल
रंगोत्सव का मुख्य आकर्षण 3 मार्च को तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। इस दौरान भगवान महाकाल को प्राकृतिक गुलाल अर्पित कर होली की शुरुआत की जाएगी। अवंतिकानाथ के आंगन में होने वाले इस अद्भुत दृश्य का साक्षी बनने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं।
8 मार्च को टेसू के फूलों और केसरिया रंग से मनेगी रंगपंचमी
महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार, 8 मार्च को रंगपंचमी पर भस्म आरती में भगवान महाकाल टेसू (पलाश) के फूलों से बने प्राकृृतिक केसरिया रंग से होली खेलेंगे। हालांकि पहले कई क्विंटल फूलों से सैकड़ों लीटर रंग बनाया जाता था, लेकिन अब सुरक्षा और भक्तों की सुविधा के मद्देनजर भगवान को प्रतीकात्मक रूप से केसरिया रंग का एक लोटा अर्पित किया जाएगा।
शीघ्र दर्शन टिकटों से मंदिर समिति को मिले 62 लाख रुपए
बाबा महाकाल के दरबार में 15 और 16 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व के दौरान आम दर्शनार्थियों के साथ-साथ हजारों भक्तों ने 250 रुपये की शीघ्र दर्शन रसीद के माध्यम से दर्शन का लाभ लिया। रविवार को 20,700 और सोमवार को 4,300 श्रद्धालुओं ने इस सुविधा का उपयोग किया। इस प्रकार कुल 25,000 टिकटों की बिक्री से मंदिर प्रबंध समिति को 62 लाख 50 हजार रुपये की आय हुई। गौर करने वाली बात यह है कि दान पात्रों में आई राशि की गणना अभी बाकी है, जिससे आय का आंकड़ा और भी बढऩे की उम्मीद है।
शिव नवरात्रि में बिका 400 क्विंटल से अधिक लड्डू प्रसाद
6 फरवरी से शुरू हुए शिव नवरात्रि पर्व के समापन तक मंदिर में लड्डू प्रसादी की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई। प्रबंध समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए रागी और बेसन के विशेष लड्डुओं की व्यवस्था की गई थी। 16 फरवरी तक कुल 410.6 क्विंटल लड्डुओं का प्रसाद भक्तों द्वारा खरीदा गया, जिसकी कुल लागत 1.95 करोड़ रुपये रही।
आज होंगे भगवान के पंच मुखारविंद दर्शन
महाशिवरात्रि पर्व के समापन के बाद आज, 18 फरवरी (फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा) को भगवान महाकाल के विशेष पंच मुखारविंद दर्शन की परंपरा निभाई जाएगी। आज संध्या आरती के दौरान भक्त भगवान के पांच स्वरूपों के एक साथ दर्शन कर सकेंगे। यह महाशिवरात्रि उत्सव के पूर्ण होने का एक विशेष धार्मिक विधान है।
4 मार्च से यह हो जाएगा आरती समय
बालभोग आरती- सुबह 7 से 7.45 बजे तक (30 मिनट पहले)
भोग आरती- सुबह 10 से 10.45 बजे तक (30 मिनट पहले)
संध्या आरती– शाम 7 से 7.45 बजे तक (30 मिनट देरी से)
नोट-भस्म आरती (तड़के 4 बजे) और शयन आरती (रात 10.30 बजे) के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है।









