यह है सरकारी अस्पताल: मोबाइल टॉर्च से इमरजेंसी में इलाज….

जिला अस्पताल की रात में लाइट गुल होने से डॉक्टर और मरीज परेशान
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जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में मोबाइल की फ्लैश लाइट में मरीज का उपचार करते ड्यूटी डॉक्टर।
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन। सरकारी कामों में लापरवाही तो आम बात है, लेकिन जिला मुख्यालय के हॉस्पिटल में इमरजेंसी की लाइट गुल होने के कारण डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च लाइट से मरीजों का इलाज करना पड़ा और पर्चे आदि बनाने का काम करना पड़ा।
सरकारी अस्पताल में चौबीस घंटे लाइट चालू रखी जाती है, लेकिन कई बार यहां भी बिजली गुल होने की गंभीर दिक्कत खड़ी हो जाती है। बुधवार देर रात करीब 3 बजे से इमरजेंसी की लाइट फाल्ट हो गई। इस कारण इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कपिल वर्मा सहित स्टाफ को मोबाइल टॉर्च से रोशनी कर मरीजों के उपचार के लिए दवाइयां लिखने और पर्चे बनाने जैसे जरूरी काम करना पड़े।
गंभीर घटना होने का अंदेशा
इमरजेंसी की लाइट गुल होना गंभीर माना जा रहा है। इससे कभी भी किसी मरीज के लिए जानलेवा हालात बन सकते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी शाम 6 बजे से बंद हो जाती है और सुबह 9 बजे बाद ही खुलती है। इस कारण शाम 6 बजे बाद से सुबह 9 बजे तक इमरजेंसी में ही मरीजों का उपचार होता है। ऐसे में लाइट गुल होने से बड़ी अप्रिय घटना होने का अंदेशा है।
कलेक्टर मिश्र खुद जाते थे निरीक्षण पर
पूर्व कलेक्टर शशांक मिश्र स्वयं जिला चिकित्सालय में सुबह अचानक निरीक्षण पर पहुंचते थे। इस कारण हॉस्पिटल की कई खामियां भी पकड़ में आती थीं और जिला चिकित्सालय के अफसरों में भी खौफ रहता था। अब न जनप्रतिनिधि हॉस्पिटल की सुध लेते हैं न अफसर।
मच्छरों के काटने से बेहाल…
इमरजेंसी की लाइट में फाल्ट आ जाने से पंखे आदि भी बंद रहे। इस कारण सभी ड्यूटी डॉक्टर मच्छरों के काटने से बेहाल रहे। सुबह तक लाइट नहीं आ सकी थी।









