शीत लहर से स्वास्थ्य संबंधी हो सकती हैं समस्याएं

By AV NEWS

शीत लहर से स्वास्थ्य संबंधी हो सकती हैं समस्याएं

विशेषज्ञों की सलाह सतर्कता बरते

उज्जैन। वर्तमान में शीत ऋतु में शीत-घात (शीत लहर) की वजह से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं को समय से पूर्व बचाव कर लिया जायें तो इस विपदा का सामना किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार शीत लहर से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सतर्कता बरते।

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में गर्म कपड़े पहनें। गर्म कपड़े जैसे- दस्ताने, टोपी, मफलर, एवं जूते आदि पहनें। शीतलहर के समय चुस्त कपड़े न पहने यह रक्त संचार को कम करते है, इसलिये हल्के ढीले-ढाले एवं सूती कपड़े बाहर की तरफ एवं ऊनी कपड़े अंदर की तरफ पहनें।

नियमित रूप से गर्म पेय पीते रहें। शीत लहर के समय विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना अधिक बढ़ जाती है। फ्लू चलना, सर्दी, खांसी एवं जुकाम आदि के लक्षणों हो जाने पर चिकित्सक से संपर्क करें। अल्प तापवस्था के लक्षण जैसे- सामान्य से कम शरीर का तापमान, न रूकने वाली कंपकपी, याददाश्त चले जाना, बेहोशी या मूर्छा की अवस्था का होना, जबान का लडख़डाना आदि प्रकट होने पर चिकित्सक से संपर्क कर उपचार प्राप्त करें।

पाला पडऩे की आशंका

शीत लहर से पाला पडऩे की आशंका है। ऐसी स्थिति में किसान सावधानी बरत कर फसलों को बचा सकते हैं। पाले की संभावना पर रात में खेत में 6-8 जगह पर धुआं करना चाहिये।

यह धुुआं खेत में पड़े घास-फूस अथवा पत्तियां जलाकर भी किया जा सकता है। यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिये कि धुआं सारे खेत में छा जाए। पाले की संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई कर देना चाहिये।

– रसायन से पाला नियंत्रण किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर रसायनों का उपयोग करके भी पाले को नियंत्रित किया जा सकता है।

– अधिक जानकारी के लिये आपके क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं तकनीकी सलाह हेतु नजदीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क करें।

यह बरते सावधानी…

शीत लहर के समय जितना संभव हो सके घर के अंदर ही रहें और कोशिश करें कि अतिआवश्यक हो तो बाहर यात्रा करें।

पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त भोजन ग्रहण करें।

शरीर की प्रतिरक्षा बनाए रखने के लिए विटामिन ‘सी’ से भरपूर फल और सब्जियां खायें एवं नियमित रूप से गर्म तरह पदार्थ अवश्य पीयें।

अधिक ठंड पडऩे पर पर्याप्त वेंटिलेशन होने पर ही हीटर का उपयोग करें।

अत्यधिक ठंड पडऩे से प्रभावित शरीर के हिस्से पर मालिश न करें इससे अधिक नुकसान पड़ सकता है। शीत लहर में अधिक ठंड के लम्बे समय तक सम्पर्क में रहने से त्वचा कठोर एवं सुन्न कर सकती है। शरीर के अंगो जैसे- हाथ/पैर की उंगलियों, नाक एवं कान में लाल फफोले हो सकते है।

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