साढ़े तीन साल बाद फिर उज्जैन महापौर चुनाव चर्चा में आया

कोर्ट ने महापौर और निर्वाचन अधिकारी की आपत्तियां खारिज की, कांग्रेस प्रत्याशी की चुनाव याचिका पर सुनवाई का रास्ता खुला
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प्रधान जिला न्यायाधीश ने प्रत्यर्थी 1, 4 और 5 के आवेदन किए निरस्त; मतगणना में गड़बड़ी और रिकाउंटिंग न करने के हैं आरोप
उज्जैन। करीब साढ़े तीन साल पहले हुए उज्जैन नगर निगम के महापौर चुनाव का फैसला कोर्ट के फैसले से फिर चर्चा में आ गया है। प्रधान जिला न्यायाधीश पी.सी. गुप्ता की अदालत ने कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार की चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मान लिया है। उन्होंने प्रत्यर्थी क्रमांक-1 (महापौर), प्रत्यर्थी क्रमांक-4 (निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान) और प्रत्यर्थी क्रमांक-5 (जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर) की ओर से दाखिल आवेदनों को खारिज कर दिया है। इसी के साथ चुनाव याचिका पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल 17 जुलाई 2022 को उज्जैन नगरनिगम बोर्ड के लिए चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई थी। इसमें महापौर पद पर भाजपा के मुकेश टटवाल को जिला निर्वाचन अधिकारी ने विजेता घोषित किया था। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी तराना के विधायक महेश परमार ने इस जीत को चुनौती देते हुए रिकाउंटिंग की मांग की थी लेकिन तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी आशीषसिंह ने इसे खारिज कर दिया था।
परमार ने इस संबंध में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी तरफ से पैरवी करने वाले सीनियर हाईकोर्ट एडवोकेट रसिक सुगंधी ने बताया कि याचिका में आरोप है कि मतगणना के बाद निर्वाचन अधिकारी ने याचिकाकर्ता महेश परमार को 1,33,317 और प्रत्यर्थी क्रमांक-1 (भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी) को मुकेश टटवाल को 1,34,240 मत प्राप्त होने की घोषणा करते हुए परमार को 923 मतों से पराजित घोषित कर दिया था।
इस पर परमार ने तुरंत आपत्ति लेते हुए फिर से मतगणना (रिकाउंटिंग) की मांग की थी। याचिका अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने पहले आश्वस्त किया था कि आंकड़े गलत मिलने पर रिकाउंटिंग होगी, लेकिन बाद में मांग खारिज कर दी गई। प्रारूप 21-क में जानबूझकर असत्य आंकड़े दर्ज किए गए। आरोप यह भी है कि मतदान केंद्र 274 पर परमार को 277 मत मिले थे, लेकिन 217 मत दर्शाकर 60 वैध मतों को अस्वीकृत कर दिया गया था।
न्यायालय का निर्णय: बिना साक्ष्य नहीं पहुंच सकते निष्कर्ष पर
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद 19 फरवरी 2026 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने याचिका में सभी आवश्यक बिंदुओं का विस्तृत उल्लेख किया है। समर्थन में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने कहा कि प्रत्यर्थियों की आपत्तियां प्रथम दृष्टया स्वीकार योग्य नहीं हैं और बिना साक्ष्य लिए इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता कि याचिका असत्य रूप से प्रस्तुत की गई है। इस आधार पर न्यायालय ने प्रत्यर्थी 1, 4 और 5 द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदनों (आई.ए. नंबर 02/22 से 04/22) को निरस्त कर दिया है।
प्रतिवादियों ने लगाई थी याचिका निरस्त करने की गुहार
इस चुनाव याचिका (क्र. 02/2022) के खिलाफ प्रत्यर्थी क्र.-1, क्र.-4 और क्र.-5 ने आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत आवेदन (आई.ए. नंबर 2/22, 3/22 और 4/22) प्रस्तुत कर अदालत से इसे निरस्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि याचिका विधिक प्रावधानों के विपरीत है, इसमें वाद कारण का अभाव है, तथ्यों को छिपाया गया है और इसका सत्यापन सही नहीं है, इसलिए इसे प्रारंभिक तौर पर ही खारिज किया जाए।
महेश परमार ने कहा यह सत्य की ओर एक कदम, टटवाल ने कहा उन्हें जानकारी नहीं: याचिका सुनवाई के लिए स्वीकृत होने पर कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह सत्य की दिशा में एक कदम ओर बढऩे जैसा है। कोर्ट से हम हर हाल में जीतेंगे। महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि उन्हें याचिका खारिज होने की जानकारी नहीं है। क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर कोई याचिका दायर नहीं की थी।










