हवाई सेवाओं के लिए दताना-मताना पट्टी का 187.70 करोड़ रुपये से होगा विस्तार

हवाई सेवाओं के लिए दताना-मताना पट्टी का 187.70 करोड़ रुपये से होगा विस्तार
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सांवराखेड़ी में नए हेलीपेड का निर्माण भी प्रस्तावित……बड़े एयर पोर्ट के लिए 300 एकड़ से अधिक जमीन की आवश्यकता
उज्जैन।श्री महाकाल महालोक निर्माण के बाद उज्जैन में पर्यटन बढ़ा है, देश-विदेश के यात्री यहां आ रहे हैं। इसके साथ ही उज्जैन के निकट इंदौर के साथ ही भोपाल हवाई अड्डे पर एयर ट्रैफिक का लोड बढ़ गया हैं।
इसे देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उज्जैन में हवाई सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। ताकि बड़े विमान भी सीधे यहां उतर सकें और यात्रियों को श्रीमहाकाल के दर्शन के लिए लंबी दूरी तय न करना पड़े। साथ ही दताना-मताना हवाई पट्टी, डीआरपी लाइन हेलीपेड का विस्तार और सांवराखेड़ी में नए हेलीपेड का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया है।
हवाई जहाज से आने वाले यात्री इंदौर आकर उज्जैन पहुंचते हैं। अभी विमान इंदौर में उतरते हैं, फिर उज्जैन में उतरेंगे। मंदिरों की नगरी उज्जैन में हवाई अड्डा बनाया जाएगा। देवास रोड स्थित दताना-मताना हवाई पट्टी का विस्तार कर इसे हवाई अड्डे के तौर पर परिवर्तित किया जाएगा।
इसके लिए भूमि का अधिग्रहण, हवाई पट्टी की लंबाई-चौड़ाई बढ़ाने एवं बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा। उज्जैन के सांवराखेड़ी क्षेत्र में वाकणकर पुल के पास नए स्थाई हेलीपेड का निर्माण भी किया जाएगा।
डीआरपी लाइन स्थित हेलीपेड के पास लाउंज बनाया जाएगा। इन सभी निर्माण कार्यों के लिए 187 करोड़ 70 लाख 77 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। श्री महाकाल महालोक निर्माण के बाद उज्जैन में पर्यटन बढ़ा है। उज्जैन में हवाई सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। ताकि बड़े विमान भी सीधे यहां उतर सकें।
प्रस्तावित योजना पर एक नजर…
दताना मताना हवाई पट्टी का करीब 2.50 किमी लंबा विस्तार किया जाएगा। यहां एमआइटी कॉलेज तथा विक्रम उद्योगपुरी की ओर जमीन अधिग्रहण की जा सकती है। हवाई पट्टी के पीछे तरफ 100 मीटर तो एमआइटी कॉलेज रोड की ओर 250 मीटर से ज्यादा जमीन अधिग्रहीत किए जाने का प्रस्ताव है। वर्तमान में हवाई पट्टी की लंबाई 1180 मीटर है जिसे बढ़ाकर 2.50 किमी तक की जा सकती है।
इंदौर पर ज्यादा लोड, उज्जैन बनेगा विकल्प: दताना मताना हवाई पट्टी उज्जैन के विकास ही नहीं विमानन विभाग के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। इसके पीछे बताया जा रहा कि भोपाल हवाई अड्डे की क्षमता फुल हो गई और वहां का लोड इंदौर आ गया है। इंदौर हवाई अड्डे पर भी अत्यधिक दबाव है इसलिए दताना मताना हवाई पट्टी का विकास जरूरी है। इसके बनने से इंदौर में आने वाले चार्टेड प्लेन को उज्जैन भेजा जाएगा और रात में खड़े होने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए फ्यूल चार्जेस में कमी भी की जा सकती है।
उज्जैन में बड़े एयरपोर्ट के लिए 300 एकड़ से अधिक जमीन की आवश्यकता है। एयरपोर्ट के लिए करीब डेढ़ वर्ष पहले केंद्रीय नगरीय नागरिक उड्डयन मंत्री मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखा है। इसमें नागरिक उड्डयन मंत्री ने उज्जैन हवाई पट्टी को विकसित करने के संबंध में सीएम से मांग की है।
सिंधिया ने लिखा कि राज्य सरकार हवाई पट्टी को विकसित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराएं। उज्जैन हवाई पट्टी मध्यप्रदेश सरकार के स्वामित्व में है। ऐसे में इसके विकास में खर्च होने वाली अनुमानित राशि 200 करोड़ रुपए आंवटित करने का अनुरोध सिंधिया ने किया था।
सिंधिया ने पत्र में लिखा था कि एटीआर 72 विमान के परिचालन के लिए फेज -1 में विकास के लिए अतिरिक्त 252 एकड़ भूमि और एयरबस 320 विमान के परिचालन के लिए फेज -॥ में विकास के लिए अतिरिक्त 207 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। उज्जैन देवास राजमार्ग और उसके पूर्व में सड़क का डायवर्जन भी जरूरी है।









