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अब कैमरों की नजर में रहेंगे मंत्रालय के कर्मचारी

दो अटेंडेंस सिस्टम फेल, समय पर दफ्तर पहुंचने की आदत डालने प्रशासन की कवायद

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भोपाल। मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारियों की लेटलतीफी रोकने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। हस्ताक्षर रजिस्टर और आधार आधारित फेस अटेंडेंस सिस्टम से अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने फेस रिकॉग्निशन कैमरों से उपस्थिति दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। मंत्रालय की तीनों बिल्डिंग में करीब 30 स्थानों पर 100 कैमरे लगाए जाएंगे। फिलहाल नई बिल्डिंग वीबी-2 के राजस्व विभाग के प्रवेश द्वार पर दो कैमरों से ट्रायल किया जा रहा है। व्यवस्था नवंबर से औपचारिक रूप से लागू करने की तैयारी है।

नई व्यवस्था का मकसद केवल कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करना नहीं, बल्कि उनके कार्यालय आने-जाने का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना भी है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कर्मचारी कब कार्यालय पहुंचे और कब बाहर निकले। हालांकि, सिस्टम लागू होने के बाद यह कितना प्रभावी होगा, यह इसकी तकनीकी कार्यप्रणाली और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।

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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सख्ती की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के साथ प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे। 7 जनवरी, 15 मई और 25 अगस्त को हुई समीक्षा बैठकों में भी समय पर कार्यालय पहुंचने की व्यवस्था पर जोर दिया गया।

30 स्थानों पर कैमरे, अलग-अलग एंगल से होगी पहचान

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सामान्य प्रशासन विभाग की योजना के अनुसार, मंत्रालय की तीनों इमारतों में लगभग 30 स्थानों पर 100 फेस रिकॉग्निशन कैमरे लगाए जाएंगे। प्रत्येक स्थान पर तीन से चार कैमरे लगाने की योजना है, जिससे कर्मचारियों की पहचान अलग-अलग कोणों से की जा सके। फिलहाल वीबी-2 के ग्राउंड फ्लोर पर राजस्व विभाग के प्रवेश द्वार पर दो कैमरों से परीक्षण किया जा रहा है।

दो व्यवस्थाएं बदलीं, लेकिन लेटलतीफी पर नहीं लगा अंकुश
मंत्रालय में समय की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए पिछले दो वर्षों में दो व्यवस्थाएं अपनाई गईं। जून 2024 में कर्मचारियों के लिए उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करना अनिवार्य किया गया। इसके बाद फरवरी 2025 में आधार आधारित फेस अटेंडेंस व्यवस्था शुरू की गई। इसके बावजूद कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वर्तमान में कई विभागों में कर्मचारी अपने-अपने उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करके हाजिरी दर्ज कराते हैं। मंत्रालय में ऐसे में सभी की उपस्थिति और कार्यालय आने-जाने के समय का प्रभावी रिकॉर्ड बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। अब कैमरों के जरिए इस व्यवस्था को अधिक निगरानी आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।

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