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उज्जैन:कोरोना की दूसरी लहर के आने-जाने के बीच का अंतर रहा 17.6 प्रतिशत

उच्चतम पर पॉजिटिव मरीज आए थे 326, टेस्टिंग बढ़ती गई,मरीज घटते गए

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उज्जैन। शहर में कोरोना का पिक 18 अप्रैल से आना शुरू हो गया था। यह पिक अपने उच्चतम स्तर पर 26 अप्रैल को पहुंचा। पिक के साथ ही जिला प्रशासन ने टेस्टिंग की संख्या बढ़ा दी। अधिक टेस्ट होने पर पहले तो अधिकतम पॉजिटिव आए ओर बाद में टेस्ट अधिक होते चले गए,लेकिन पॉजिटिव की संख्या कम होती चली गई। 26 मई के बाद पिक उतार पर आ गया। अब तो स्थिति तेजी से सामान्य होती जा रही है।

कोरोना के पिक को लेकर प्रतिदिन आंकड़ों का अध्ययन करने का काम डॉ.संजीव कुमरावत ने किया। प्रतिदिन पॉजिविटी का प्रतिशत निकाला और अपने निष्कर्ष प्रशासन को सौंपा। टेस्टिंग बढ़ाने के साथ-साथ लॉकडाउन के चलते जिस प्रकार से प्रशासन ने सख्ती की,उसके परिणाम तेजी से सामने आए तथा यह पिक एक माह में अपने उतार पर आ गया। पिछले कोरोनाकाल में यह देखने में इसलिए नहीं आया, क्योंकि अनुभव और चिकित्सकों द्वारा अपनाई जाने वाली चिकित्सा पद्धति में अंतर था। उस समय अनुभव की जगह प्रयोग थे और इस समय अनुभव के आधार पर परिणाम थे।

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18 अप्रैल ,21 को कोरोना टेस्ट की संख्या 1671 थी और उस दिन कोरोना पॉजिटिव की संख्या 311 रही थी। उस दिन पॉजिविटी रेट 18.6 प्रतिशत था। प्रशासन ने टेस्टिंग बढ़ाई और 23 अप्रैल को 1750 सैंपल लिए गए। इनमें से उस दिन 350 पॉजीटिव्ह आए। पॉजिविटी रेट 20 प्रतिशत रहा। इसके बाद 25 एवं 26 मई को टेस्टिंग कम हुई, लेकिन 26 अप्रेल को पीक पर था। इस दिन 1464 सैंपल में से 326 पॉजिटिव आए। रेट रहा 22.3 प्रतिशत, जोकि चरम था। यहां से आंकड़े नीचे गिरना शुरू हो गए। बीच में 5 और 10 मई को जरूर कम टेस्टिंग के बाद भी प्रतिशत 20 के उपर रहा। 11 मई से पॉजिविटी रेट नीचे आना शुरू हो गया था। इस दिन 13.6 प्रतिशत था जोकि 28 मई को 2.5 प्रतिशत पर आ गया। जबकि 28 मई को 2454 सेम्पल लिए गए थे।

15 जून तक आ जाएगा शून्य पर
डॉ.कुमरावत के अनुसार कोरोना मरीजों का प्रतिशत 15 जून तक शून्य पर आ जाएगा। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि इसके बाद कोरोना पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। यदि नागरिकों ने मॉस्क पहनना,तय दूरी रखना तथा सेनेटाईजर का उपयोग/साबुन से हाथ धोने का काम किया तो संभव है कि इसके आगे के माह बगैर समस्या के गुजर जाएंगे।

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