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उज्जैन:सरकारी अस्पताल हाउसफुल… प्रायवेट डॉक्टरों के यहां सुबह 6 बजे से लग रही लाइन

बच्चें में वायरल फीवर का प्रकोप, प्रायवेट अस्पतालों में भी बेड नहीं

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उज्जैन।लगातार बदलते मौसम के मिजाज की वजह से बच्चों से लेकर हर उम्र वर्ग के लोग वायरल सहित मलेरिया, डेंगू, टायफाइड आदि बीमारियों से पीडि़त हो रहे हैं, लेकिन बीमार होने वालों में बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। स्थिति यह है कि शिशु चिकित्सालय चरक अस्पताल से लेकर अधिकांश प्रायवेट अस्पतालों में बेड खाली नहीं मिल रहे, जबकि प्रायवेट क्लिनिकों में बच्चों के परिजन सुबह 6 बजे से नंबर लगाने पहुंच रहे हैं।

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फ्रीगंज स्थित शिशु रोग विशेषज्ञ के क्लिनिक के बाहर करीब 50 की संख्या में लोग लाइन लगाकर खड़े थे। सबसे पहले अपना नंबर लगाने आये व्यक्ति ने बताया कि मैं सुबह 6 बजे सबसे पहले यहां पहुंचा था। क्लिनिक 9 बजे खुलेगा। कर्मचारी आकर सभी को नंबर देगा उसके बाद बेटे को घर से लाकर डॉक्टर को दिखाएंगे। इस व्यक्ति का बालक सर्दी, खांसी, बुखार से पीडि़त है। इसके पीछे सुबह 8 बजे तक 50 अन्य लोग आकर खड़े हो चुके थे। यह सभी लोग अपने बच्चों को दिखाने के लिये डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। डॉक्टर ने दीवार और शटर पर अजीब से पम्पलेट्स लगाये हैं।

बच्चा सीरियस हो तो प्रायवेट अस्पताल ले जाकर डॉक्टर से बात कराएं

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एक पम्पलेट में लिखा है जांच में देरी हेतु आपको सुझाया गया पंजीयन का समय में देरी हो सकती है कृपया नाराज न हों, दूसरे पम्पलेट में लिखा है समयाभाव के कारण फोन से नम्बर लगाना संभव नहीं है। कृपया स्वयं आकर क्लिनिक पर नम्बर लगावें व नम्बर आने पर मरीज दिखावें। तीसरे पम्पलेट में लिखा है बच्चा सीरियर इमरजेंसी होने पर बताये गये निश्चित प्रायवेट अस्पतालों में जाकर रवि राठौर सर की ड्यूटी डॉक्टर से बात कराएं।

यह है परिजनों की मजबूरी

बच्चों में तेजी से फैल रहे वायरल फीवर का असर यह हो रहा है कि बच्चों को तेज बुखार, उल्टी आदि की समस्याएं हो रही हैं। सामान्य डॉक्टरों से उनका उपचार संभव नहीं हो पा रहा। शिशु रोग विशेषज्ञ भी बुखार के नये वेरियंट से आश्चर्य में पड़े हुए हैं। बीमार बच्चों के परिजनों की मजबूरी यह है कि सरकारी अस्पताल हाऊसफुल है। चरक अस्पताल में क्षमता से अधिक बच्चे उपचाररत हैं और प्रायवेट अस्पतालों में भी बीमार बच्चों को भर्ती करने के लिये बेड नहीं मिल रहे।

फीवर क्लिनिक में लापरवाही
वर्तमान में कोरोना संक्रमण के मरीज नहीं आ रहे लेकिन वायरल फीवर से प्रभावित सर्दी, खांसी, बुखार के मरीज जिला चिकित्सालय के फीवर क्लिनिक पहुंच रहे हैं लेकिन यहां की स्थिति यह है कि सुबह 9 बजे खुलने वाले क्लिनिक पर 10 बजे तक सेम्पल लेने वाले कर्मचारी नहीं आते। सुबह यहां मरीजों को देखने के लिये मात्र एक प्रशिक्षु डॉक्टर मौजूद था।

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