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उज्जैन: …इधर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी भी जारी है…

पात्रों को नहीं मिल रहे… क्योंकि अपात्र इसे खरीद रहे अधिक दामों पर

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उज्जैन। शहर में अभी भी रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी जारी है। अब कालाबाजारी का नया तरीका अपना लिया गया है। ऐसा तरीका जिसे प्रशासन इसलिए नहीं पकड़ पा रहा है क्योंकि नियम ही प्रशासन का बनाया हुआ है। शहर के कतिपय प्रायवेट हॉस्पिटल्स के मेडिकल स्टोर्स संचालकों द्वारा तो गली निकाली गई है।

रेमडेसिविर को लेकर यह प्रक्रिया अपना रहा है प्रशासन
प्रतिदिन अपर कलेक्टर जितेंद्रसिंह एवं ड्रग इंस्पेक्टर धर्मसिंह कुशवाह द्वारा प्रायवेट हॉस्पिटल्स से प्राप्त रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड का पत्र प्राप्त किया जाता है। डिमांड जितने इंजेक्शन की रहती है, आवक के अनुसार उस अनुपात में सभी हॉस्पिटल्स को इंजेक्शन की बिलिंग करवाई जाती है। डिमांड में मरीज का नाम और मोबाइल नम्बर लिखा होता है। इंजेक्शन प्रायवेट हास्पिटल्स परिसर में ही संचालित मेडिकल स्टोर्स संचालक को मिलते हैं। वह अपनी सुविधा से जान-पहचानवालों और कथित रूप से अधिक दाम देने वालों के इंजेक्शन पूर्व में ही निकाल लेता है।

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यहां है कमी…इन मेडिकल स्टोर्स संचालकों को निर्देश हैं कि रात्रि में वे जिन्हे इंजेक्शन प्रदाय किए गए हैं,उनके नाम की सूची ओर मोबाइल नम्बर दें। इस सूची अनुसार रेंडम आधार पर कुछ को फोन लगा लिया जाता है। दूसरी ओर से जवाब आता है-जी, हमें मिल गया इंजेक्शन। ऐसे में अधिकारी संतुष्ट हो जाते हैं। इधर नींद उनको नहीं आती,जिनका मरीज क्रिटिकल होता है और बावजूद इसके उन्हे इंजेक्शन नहीं मिल पाता है। क्योंकि उन्हे कहा जाता है आज कम आए,आपका मरीज ठीक है,जो अधिक गंभीर है,उनको लगवा दिए।

यह होना चाहिए…जो सूची इंजेक्शन की डिमांड के रूप में मेडिकल स्टोर्स संचालक ड्रग इंस्पेक्टर को देते हैं,उस सूची में क्रिटिकल मरीजों की प्राथमिकता से नाम मंगवाए जाएं। उसी सूची के नामों के आगे मोबाइल नम्बर बुलवाएं जाएं,जोकि मेडिकल स्टोर्स संचालक नहीं लिखते है। उक्त सूची के आधार पर इंजेक्शन दिए जाएं और रात्रि में उसी सूची अनुसार मरीजों को या उनके परिजनों को दिए गए नम्बर पर फोन करके कंफर्म किया जाए। जो गड़बड़ हो रही हे,पकड़ में आ जाएगी।

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इस तरह होती है इंजेक्शन की कालाबाजारी…जो डिमांड जाती है,उसमें कतिपय हॉस्पिटल्स के मेडिकल स्टोर्स से करीब 4 से 5 नाम उन कोविड मरीजों के होते हैं जो या तो हॉस्पिटल में उपचार के दौरान मर गए या फिर ठीक होने पर उनकी छुट्टी हो चुकी है। ऐसे में 4 से 5 रेमडेसिविर इंजेक्शन इनके पास एक्स्ट्रा आ जाते हैं।

एक मामला ऐसे ही पकड़ा गया…

माधवनगर थाना क्षेत्र में एक मामला ऐसा ही पकड़ा गया लेकिन संबंधित को प्रभावशाली व्यक्ति ने थाने से ही छुड़वा लिया। मेडिकल स्टोर्स संचालक के कर्मचारी ने उपर बताई गई गड़बड़ी की। एक मरीज के परिजन ने शिकायत कर दी कि मरे हुए ओर डिस्चार्ज हुए के नाम के इंजेक्शन आए तथा अधिक दाम पर बेचे गए। कर्मचारी को पुलिस ने पकड़ा तो उसने राज उगल दिया। उसे थाने पर बैठाया गया। हालांकि बाद में पुलिस ने इस बात से इंकार कर दिया।

इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर धर्मसिंह कुशवाह का कहना है कि हम जो सूची मिलती है,उसे वापस कर देते हैं और रात को जो सूची मिलती है,उससे टेली करते हैं। अब पहलेवाली सूची से टेली कर लिया करेंगे।

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