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दुर्भाग्य! स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण में उज्जैन नहीं, क्योंकि….

दुर्भाग्य! स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण में उज्जैन नहीं, क्योंकि सर्वे का क्लेम ही नहीं किया

जिला पंचायत के अधिकारियों को नहीं पता सर्वेक्षण और जिले की रैंकिंग का

उज्जैन।पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण की रैंकिंग जारी की है। इसमें उज्जैन जिले का नंबर तो दूर नाम तक नहीं है,दरअसल जिला पंचायत ने स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण के लिए (क्लेम) ही नहीं किया था। ऐसे में सर्वेक्षण में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता है।

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इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ अंकिता धाकरे का रवैया उदासीन भरा रहा। वे सर्वेक्षण से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं दे सकी। व्यस्तता का हवाला देकर उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट ऑफिसर से संपर्क करें, लेकिन प्रोजेक्ट ऑफिसर का नाम नहीं बताया। बता दें कि जिला पंचायत में तकरीबन चार प्रोजेक्ट ऑफिसर कार्यरत है।

शासन/ प्रशासन द्वारा उज्जैन का राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर प्रतिष्ठित करने के अनेक प्रयास और जतन कर रहे है,लेकिन सरकारी महकमे की लालफीताशाही प्रवृति से अधिकारी बाहर ही नहीं निकल पा रहे है। यह अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण २०२२ के लिए उज्जैन से कोई दावा ही नहीं भेजा गया।

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नतीजतन उज्जैन जिला इसमें शामिल नहीं माना गया। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय ने केंद्रीय एजेंसी से स्वच्छता सर्वेक्षण कराया गया था। जिला पंचायत के सूत्रों के अनुसार इसके लिए मंत्रालय द्वारा सर्वेक्षण के लिए तय सेगमेंट के आधार पर काम/योजना के प्रस्ताव की जानकारी दावे के साथ भेजना थी। यह जानकारी नहीं भेजी जाने से उज्जैन का दावा नहीं बना और उज्जैन दौड़ में शामिल ही नहीं हो पाया।

स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण-2022 भोपाल पहले और इंदौर तीसरे स्थान पर

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बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण-2022 के परिणाम जारी कर दिए गए हैं। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत यह सर्वेक्षण करवाया गया था। इसमें वेस्ट जोन में मध्य प्रदेश पहले नंबर पर रहा है, वहीं जिलों के मामले में भोपाल पहले और इंदौर तीसरे स्थान पर रहा है। यानी भोपाल के गांव सबसे स्वच्छ हैं। मध्यप्रदेश के साथ गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और गोवा के जिलों को पछाड़कर भोपाल ने प्रथम स्थान हासिल किया है।

यह स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण के सेगमेंट

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण के प्रत्येक जिले का मूल्यांकन चार मापदंडों के आधार किया गया।

लोगों के लिए सुरक्षित शौचालय और इनका प्रयोग(शौचालय का उपयोग, जल की सुलभता, जल का सुरक्षित निपटान) (40 प्रतिशत)

घरों के आसपास कूड़ा-कचरा फैला न होना (30 प्रतिशत)

सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा-कचरा फैला न होना (10 प्रतिशत)

घरों के आसपास अवशिष्ठ जल का जमाव न होना (20 प्रतिशत)

ऐसे हुआ सर्वेक्षण…. जानकारों के अनुसार शहरों की तरह गांवों में भी पहली बार सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण का दावा करने वाले प्रदेश के विभिन्न जिलों के गांवों में पिछले साल नवंबर-दिसंबर के साथ इस साल मार्च-अप्रैल और जून में केंद्रीय एजेंसी / टीमों ने जाकर सफाई की हकीकत देखी थी।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सूखे-गीले कचरे का निपटान समेत सफाई से जुड़े कई पैमाने टीमों ने देखें थे। इस आधार पर अंक और रैकिंग तय की गई। जिला पंचायत उज्जैन सूत्रों के अनुसार सर्वेक्षण के लिए दावा नहीं होने से केंद्रीय एजेंसी/टीम नहीं आई थी।

जिला पंचायत सीईओ का यह कहना

स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण-2022 सर्वे और रैकिंग का पता नहीं है,लेकिन स्वच्छता को लेकर केंद्र सरकार द्वारा एक रिपोर्ट मांगी गई थी,जो जिला पंचायत द्वार भेजी गई थी। स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण के दावे के संबंध में देखकर बता सकती हूं। अधिक जानकारी के लिए प्रोजेक्ट ऑफिसर (पीओ) से संपर्क करें।-अंकिता धाकरे, जिला पंचायत सीईओ

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