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19 साल बाद सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में होगी स्थायी भर्ती

कार्यपरिषद ने पदों के युक्तियुक्तकरण को दी हरी झंडी, शासन से मंजूरी मिलते ही जारी होंगे पद

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40 लोगों को मौका मिलने की उम्मीद

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। करीब 19 साल बाद सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में स्थायी भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो ४० पदों पर स्थायी नियुक्ति का विज्ञापन शीघ्र ही जारी होने की उम्मीद है। नई नियुक्तियों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ेगी और प्रोफेसर, लेक्चरार और रीडर की कमी से जूझ रहे विश्वविद्यालय में पढ़ाई का माहौल फिर से बन सकेगा।

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दरअसल सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी परेशानी ही योग्य टीचरों की कमी है। अधिकतर विभाग और अध्ययनशालाएं अतिथि और गेस्ट टीचर के भरोसे चल रही हैं। ऐसे में सीयूईटी के जरिये विवि में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी एडमिशन के बाद खुद को ठगा महसूस करते हैं।

इसके चलते आए दिन विवि में बखेड़ा होता है। कभी टीचर की कमी तो कभी संसाधन की कमी को लेकर प्रदर्शन होते हैं। विद्यार्थी यहां से डिग्री तो हासिल कर लेते हैं लेकिन नॉलेज की कमी होने से वह रोजगार से वंचित हो जाते हैं। इन सब परेशानियों का मूल कारण शिक्षकों की कमी को माना गया है। ऐसे में नवीन अध्ययनशालाओं में शिक्षकों के स्थायी पदों पर भर्ती करने का फैसला किया गया है। कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कार्यपरिषद सदस्य डॉ. राजेश सिंह कुशवाह ने इसके लिए युक्तियुक्तकरण का प्रस्ताव तैयार किया और इसे कार्यपरिषद की आपात बैठक में रखा। सभी सदस्यों ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है।

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क्या है प्रस्ताव में

कुलगुरु प्रो अर्पण भारद्वाज और कार्यपरिषद सदस्य डॉ राजेश सिंह कुशवाह ने नए पदों की मांग का प्रतिवेदन मप्र शासन के समक्ष प्रस्तुत किया है। यह विचाराधीन है।

कैसे होगा

दरअसल, विवि ने नई शिक्षा नीति के तहत कई नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है। इन नवीन विषयों में शिक्षकों की स्थाई कमी है। इसे दूर करने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशा गया। इसके तहत शिक्षकों के पदों का युक्तियुक्तकरण किया गया। युक्तियुक्तकरण यानी वर्तमान शिक्षक पदों की पुनर्संरचना।

इन पदों को नवीन अध्ययनशालाओं में व्यवस्थित किया जा रहा है। कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत विवि ने कई नए पाठयक्रम शुरू किए हैं। इनमें एलएलबी, फोरेसिंक साइंस, फॉमेसी, डेयरी इंजीनियरिंग, कृषि, प्रमुख हैं। नवीन विषयों की अध्ययनशालाओ में विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में प्रवेश लिया है। इन्हें विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में शिक्षा दी जा रही है किन्तु विवि अब इसका स्थायी समाधान करने जा रहा है।

नवीन विषयों के प्रति विद्यार्थियों का उत्साह जबरदस्त है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अभी शैक्षणिक कार्य सुचारू है, लेकिन पदों के युक्तियुक्तकरण से अब हम स्थायी नियुक्तियों की ओर बढ़ रहे हैं, जो संस्थान के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।-डॉ. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु सम्राट विक्रमादित्य विवि

नया प्रस्ताव मप्र शासन को भेज दिया है। स्थायी पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। संभवत ४० पदों पर नियुक्ति होगी। जल्द प्रोसेस शुरू करेंगे।-डॉ. अनिल शर्मा, कुलसचिव

इन पाठयक्रम को मिलेेंगे नए टीचर

विवि की योजना एवं मूल्यांकन बोर्ड ने कार्यपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुक्रम में ं डेयरी टेक्नोलॉजी, कृषि,एविएशन (विमानन), फॉरेंसिक साइंस, विधि,इंजीनियरिंग, कॉमर्स और मैनेजमेंट तथा फिजिकल एजुकेशन विषय के लिए युक्तियुक्तकरण किया है। यानी इन पाठयक्रमों में नए शिक्षकों की नियुक्ति हो सकेंगी।

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