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भक्ति ही भव सागर से पार कराने का साधन बनेगी: मुनिश्री विशुद्धसागरजी

इंद्रदेव भी झूम झूम नाचे श्रीजी की शोभायात्रा में

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन संयम पुरुषोत्तम श्रमणाचार्य गुरुवर श्री विशुध्दसागरजी महाराज के मंगल शुभाशीष से 23 जुलाई से प्रारंभ हुआ श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान 1 अगस्त को विश्वशांति महायज्ञ एवं श्री जिनेन्द्र भगवान की शोभायात्रा के साथ पूर्ण हो गया।

मीडिया प्रभारी प्रदीप झांझरी ने बताया कि सुप्रभसागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में प्रात: अभिषेक शांतिधारा, नित्य पूजन के उपरांत विश्वशांति की कामना से हवन महायज्ञ संपन्न हुआ। अवंतिका के इतिहास में प्रथम बार एक साथ श्री जिनेन्द्र भगवान के 461 जिनबिम्बों को त्रयरथ में विराजमान कर भक्तों ने प्रभु और गुरु के प्रति अपनी श्रद्धाभक्ति शोभायात्रा निकाल कर प्रकट की। इस अवसर पर अबाल, वृध्द श्रावक-श्राविकागण अत्यंत भक्तिभाव से नृत्य कर रहे थे तो मेघकुमार जाति के देवगण भी आकाशगण में जलवर्षा कर झूम झूम नाचे।

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श्रीजी की शोभायात्रा श्री गुजराती धर्मशाला से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गों से होती हुई श्री आदिनाथ दि. जैन मंदिर ऋषिनगर पहुंची। जहां उन सभी जिनबिम्बों की अभिषेक, शांतिधारा नरेन्द्रकुमार नीरज कुमार सोगानी ने की। मुनिश्री सुप्रभसागरजी ने कहा कि श्रध्दा, भक्ति एवं पूर्ण समर्पण से किया गया विधान ही हमारे विधि के विधान को बदलने वाला होता है और उज्जैन के जैनियों ने यह सिध्द कर दिया कि हम सच्चे देव, शास्त्र, गुरू के सच्चे भक्त हैं और आपकी यह भक्ति ही आपको भव सागर से पार कराने का साधन बनेगी।

धर्मसभा के पूर्व मंगलाचण करने का सौभाग्य श्री शांतिनाथ दि. जैन महिला मंडल लक्ष्मीनगर ने किया एवं आ.श्री विशुध्दसागरजी महाराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन भी श्री शांतिनाथ दि. जैन मंदिर लक्ष्मीनगर के पदाधिकारियों ने किया। मुनिश्री पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट सि. देवेन्द्र जैन घड़ी परिवार एवं पांड्या परिवार लक्ष्मीनगर ने किया। संपूर्ण आयोजन में पं. अजीत शास्त्री ग्वालियर एवं प्रति अखिलेश शास्त्री रमगढ़ा उ.प्र. का निर्देशन प्राप्त हुआ। संचालन सुनील जैन कासलीवाल ने किया।

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