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मकर संक्रांति कब हैं जानें पूजा विधि व महत्त्व

वर्ष 2024 में 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस खास अवसर पर भगवान सूर्य देव की पूजा-व्रत करने से साधक के सुख समृद्धि के द्वार खुलते हैं और भगवान सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। चलिए जानते हैं मकर संक्रांति के अवसर पर किस विधि से सूर्य देव की पूजा करना फलदायी होगा।

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

 

मकर संक्रांति उस समय पर मनाई जाती है जब नई फसल और बंसत ऋतु का आगमन होता है। पंजाब, यूपी, बिहार, तमिलनाडु में इस वक्त नयी फसल काटते हैं और किसान मकर संक्रांति के दिन को आभार दिवस की तरह मनाते हैं। दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल (Pongal 2024) के रूप में मनाया जाता है तो जहां पंजाब और जम्मू कश्मीर में इसे ‘लोहड़ी’ (Lohri 2024) के नाम से मनाते हैं तो वहीं यूपी और बिहार में इसे ‘खिचड़ी’ कहा जाता है। इस दिन कहीं खिचड़ी (Khichdi 2024) बनती है तो कहीं दही-चूड़ा खाया जाता है और कहींं-कहीं तिल के लड्डू भी बनाए जाते हैं। मध्य भारत में इस त्योहार को संक्रांति, भोगली बिहू आदि के नाम से जाना जाता है।

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मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव प्रातः 02 बजकर 54 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

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मकर संक्रांति 2024 महत्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में जाते हैं और सौभग्य के मार्ग खोलते हैं। इसलिए इस दिन दान करने का बहुत महत्व माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य पूजा और दान करने से जीवन में अपार सफलता मिलने लग जाती है।

मकर संक्रांति सूर्य देव पूजा विधि

मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठे और दिन की शुरुआत भगवान विष्णु और सूर्य देव के ध्यान से करें।

इस दिन पवित्र नदी में स्नान करें। अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं हैं, तो नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।

नहाने के बाद तांबे के लोटे में अक्षत और फूल डालकर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इस दौरान निम्न मंत्र का जाप करें।

ऊँ सूर्याय नम: ऊँ खगाय नम:, ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ रवये नम:, ऊँ भानवे नम:, ऊँ आदित्याय नम:
इसके बाद सूर्य स्तुति का पाठ करें।

बता दें कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ होता है। इसलिए इस दिन सूर्य की उपासना अवश्य करें।

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