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महाकाल क्षेत्र के 11 स्कूल अब 12 किमी दूर दाऊदखेड़ी कैंपस में लगेंगे

यातायात के दबाव के चलते लिया निर्णय, 3000 विद्यार्थियों और 141 शिक्षकों पर सीधा असर

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उज्जैन। महाकाल मंदिर परिक्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और यातायात समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के 11 शासकीय स्कूलों को अब शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी गांव स्थित महाराजवाड़ा क्रमांक-3 सांदीपनि विद्यालय (पुराना सीएम राइज भवन) में शिफ्ट करने का आदेश जारी कर दिया गया है।

कलेक्टर कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने सोमवार को सभी प्राचार्यों को शिफ्टिंग की प्रक्रिया मार्च के अंत तक पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि 1 अप्रैल 2026 से नवीन सत्र का संचालन नए भवन में हो सके।

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इन स्कूलों का नया पता होगा दाउदखेड़ी कैंपस

शिफ्ट होने वाले प्रमुख स्कूलों में सांदीपनि उमावि महाराजवाड़ा क्रमांक-3 के साथ माधवगंज उमावि, महाराजवाड़ा क्रमांक-2, कन्या उमावि सराफा, प्रावि पालखेड़ी, सांवराखेड़ी, मावि नूतन जयसिंहपुरा, महाकाल मैदान, चांदमुख, सिकंदरी और गोथड़ा शामिल हैं। प्रशासन का तर्क है कि महाकाल महालोक बनने के बाद क्षेत्र में भारी शोर और ट्रैफिक जाम से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। दाउदखेड़ी में बना नया 90 कमरों वाला भूकंपरोधी भवन आधुनिक लैब, लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स रूम जैसी सुविधाओं से लैस है, जो छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करेगा।

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कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे

दूरी और आरटीई नियम- स्कूल को 7 से 12 किमी दूर ले जाना शिक्षा के अधिकार के उस नियम को चुनौती देता है, जो स्कूल को घर के पास होने की वकालत करता है।

परिवहन का बोझ- करीब 3000 बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने के लिए कम से कम 90 बसों की आवश्यकता होगी। यदि सरकार मुफ्त बस सुविधा नहीं देती, तो गरीब परिवारों के बच्चों में ड्रॉपआउट (पढ़ाई छोडऩे) की दर बढ़ सकती है।

सुरक्षा- संकरी गलियों से बसों का निकलना और हाईवे पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं।

अस्तित्व का संकट- एक ही कैंपस में 11 स्कूल संचालित होने से क्या छोटे स्कूलों की अपनी विशेष पहचान और नीति बरकरार रह पाएगी?

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