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लघुकथा :मोल-भाव

‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा।
’60 रुपये किलो।’उसने बताया।
60 रुपये देकर 1 किलो आम ले ले लिया।
‘बाबूजी! आपने मोल-भाव नहीं किया?’ उसने मेरी ओर देखकर आश्चर्य से कहा।
‘नहीं, मैं मेहनत करने वालों से मोल-भाव नहीं करता।’
‘यह लीजिए 15 रुपये वापस।’ लेकिन तुमने तो 60 रुपये ही बताए थे एक किलो के भाव।’
‘क्या करूं बाबूजी! सब आप जैसे तो होते नहीं कि जो बताया वह दे दिए। डेढ़ा बताते हैं तब मुश्किल से किलो पीछे 5 रुपये मिल पाता है।

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डॉ. स्वामीनाथ पाण्डेय

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