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होली पर महाकाल मंदिर और महाकाल लोक में रंग-गुलाल प्रतिबंधित, जांच के बाद मिलेगी एंट्री

कैमरों से की जाएगी निगरानी, पिछले साल की तरह इस बार लागू किया आदेश

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर एवं महाकाल लोक में पिछली बार की तरह इस बार भी होली पर 3 एवं 3 मार्च को रंग-गुलाल ले जाना, उसे उड़ाना, एक-दूसरे पर लगाना और किसी विशेष उपकरण की मदद से उसे उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शुक्रवार को महाकाल मंदिर प्रशासन ने यह आदेश जारी किया।

दरअसल, 25 मार्च 2024 को होली पर्व पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्मार्ती के दौरान गुलाल उड़ाने पर आग लग गई थी जिसमें 14 लोग झुलस गए थे। जिसमें से मंदिर के सेवक सत्यनारायण सोनी की मौत हो गई थी। इसी के चलते वर्ष 2025 की तरह ही इस बार भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रंग-गुलाल पर प्रतिबंध के साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी किसी तरह का रंग-गुलाल व अन्य कोई विशेष उपकरण लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

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जांच के बाद ही उन्हें एंट्री मिलेगी। यह आदेश मंदिर के पुजारी, पुरोहित, प्रतिनिधि, अधिकारी, पुलिसकर्मी, कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, सफाई कर्मचारी, सेवक और मंदिर परिसर स्थित अन्य छोटे-बड़े मंदिर के पुजारी, सेवक व अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी लागू होगा। इसके लिए मंदिर समिति के कंट्रोल रूम में तैनात अधिकारी एवं कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सभी प्रवेश द्वार और परिक्षेत्र की निगरानी करेंगे ताकि कोई रंग-गुलाल अथवा विशेष उपकरण लेकर प्रवेश ना कर सके।

दर्शनार्थियों को जांच के बाद एंट्री

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भगवान महाकाल के दर्शन के आने वाले श्रद्धालु ना तो रंग-गुलाल लेकर प्रवेश करेंगे और ना ही आपस में रंग लगा सकेंगे। जांच के बाद ही उन्हें एंट्री दी जाएगी। सभी प्रवेश द्वारों पर तैनात निरीक्षक एवं सुरक्षाकर्मी श्रद्धालुओं की जांच करेंगे। इसके अलावा मंदिर परिसर एवं महाकाल लोक में कार्यरत सभी संबंधित कर्मचारी एवं सेवक भी अपने साथ लाए सामान की स्वयं जांच करवाकर प्रवेश करेंगे। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करेंगे हर्बल गुलाल

श्री महाकालेश्वर मंदिर में सबसे पहले होलिका दहन होगा। मंदिर की परंपरा के अनुसार 2 मार्च को संध्या आरती के पश्चात पंडे-पुजारी मंदिर परिसर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका का विधि-विधान से पूजन करेंगे जिसके बाद होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद शहर में अन्य स्थानों पर होलिका दहन होगा। ३ मार्च को धुलेंडी पर भस्मार्ती में होली मनाई जाएगी। इस दौरान परंपरा के सम्यक निर्वहन के लिए भगवान महाकाल को सीमित मात्रा में प्रतीकात्मक रूप से हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह हर्बल गुलाल मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्मार्ती पुजारी, शयन आरती पुजारी एवं शासकीय पुजारी को उपलब्ध करवाया जाएगा।

तीन आरतियों का समय – परंपरा अनुसार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च से अश्विन पूर्णिमा तक भगवान महाकाल की प्रतिदिन होने वाली तीन आरतियों का समय भी बदल जाएगा। इसमें भस्मार्ती तड़के 4 से 6 बजे तक, दद्योदक आरती सुबह 7 से 7.45 बजे तक, भोग आरती सुबह 10 से 10.45 बजे तक, संध्या पूजन शाम 5 से 5.45 बजे तक, संध्या आरती शाम 7 से 7.45 बजे तक और शयन आरती रात10.30 से 11 बजे तक होगी। भस्मार्ती, संध्या पूजन एवं शयन आरती अपने निर्धारित समय पर ही होगी। 8 मार्च को रंगपंचमी पर परंपरानुसार बाबा महाकाल का ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा।

चंद्रग्रहण के चलते बदलेगी व्यवस्था

3 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण श्री महाकालेश्वर मंदिर की पूजा पद्धति में परिवर्तन रहेगा। शाम 6.32 से 6.46 तक रहने वाले इस 14 मिनट के ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही शुरू हो जाएगा। वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान-पूजन के बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती की जाएगी।

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