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101 दिन नगर परिषद के : शहर ने क्या पाया, क्या खोया ?

101 दिन नगर परिषद के : शहर ने क्या पाया, क्या खोया ?

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महापौर टटवाल बोले-बड़ा प्रोजेक्ट प्रारंभ नहीं, पर लोगों के हित-भावनाओं से जुड़े काम किए…

नेता प्रतिपक्ष राय का कहना-निगम का खजाना खाली, विकास छोडि़ए जनहित के काम कैसे होंगे

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उज्जैन। नई नगर निगम परिषद को अस्तित्व में आए 101 दिन हो चुके हैं। नई सरकार से नगरवासियों को अनेक उम्मीद थी। नई नगर सरकार इसमें कितनी खरी उतर पाई।

101 दिनों में शहर ने क्या पाया, क्या खोया? इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश में हमने नगर के प्रथम नागरिक यानी महापौर मुकेश टटवाल और नेता प्रतिपक्ष रवि राय से बात की। महापौर ने बड़े ही साफगोई के साथ कहा कि 100 दिनों में भले बड़ा कोई प्रोजेक्ट प्रारंभ नहीं हुआ, पर लोगों के हित और भावनाओं से जुडऩे के कई काम किए।

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वहीं, नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि निगम के पास बजट ही नहीं है। कांग्रेस के वार्डों को छोडिय़े, भाजपा पार्षदों के वार्डों में ही काम नहीं हो रहे। ‘अक्षरविश्व’ ने नगर परिषद के 101 दिन पर केवल तीन बिंदुओं पर चर्चा की एक क्या पाया? दो 100 दिन की उपलब्धि और तीन क्या नहीं कर पाए, जो 100 दिन में हो सकता था?

शहरवासियों का प्यार पाया

महापौर मुकेश टटवाल ने तीन विषय पर स्पष्टता से अपनी बात कहीं। उन्होंने कहा कि मैंने इन दिनों में शहरवासियों से जमकर प्यार पाया है। 100 दिन की उपलब्धि में बड़ा या निर्माण कार्य से संबंधित कोई काम फिलहाल खाते में नहीं है, पर लोगों के हित और भावनाओं से जुडऩे के कई काम किए।

मसलन 100 से अधिक बहुत ही छोटे-छोटे काम धंधे करने वालों का शासन की योजना का लाभ दिया। महापौर पंचायत में छोटे रोजगार करने वालों को 800 लोगों को ऋण दिया। महाकाल अन्न क्षेत्र से जुड़कर महाकाल प्रसादी को आश्रय स्थल तक पहुंचाया। पीएम आवास योजना में 500 हितग्राहियों के खाते में राशि जमा की।

बड़े प्रोजेक्ट का प्रश्न है हमने पुराने शहर की सड़कों के चौड़ीकरण का काम हाथ में लिया है। मास्टर प्लान में प्रस्तावित सड़कों का प्रस्तावों के अनुसार चौड़ीकरण होगा। एक साथ कामों का फ्रंट खोलने का कोई औचित्य नहीं है। चौड़ीकरण के सभी काम समयबद्ध समय में हो, इसके लिए अफसरों की टीम बनाई है। एक हजार कमरों की धर्मशाला बनाने की योजना है। प्रदूषण को बढऩे से रोकने के लिए शहर में तीन वन बनेंगे। चामुंडा माता के पास काम प्रारंभ हो गया है।

100 दिनों में क्या नहीं कर पाए? इस पर महापौर टटवाल ने कहा शहर के सभी 54 वार्डों में जन सहायता केंद्र प्रारंभ करना था, लेकिन केवल 5 वार्ड में केंद्र शुरू किए। 17 वार्डों में ही बर्तन बैंक शुरू हुए। संजीवनी अस्पताल नहीं बना रहे हैं।

परिषद उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी

नेता प्रतिपक्ष रवि राय का कहना है कि नगर निगम परिषद शहरवासियों की उम्मीदों में खरी नहीं उतरी है। निगम में बजट का रोना क्यों रोया जा रहा है। बजट नहीं होने का हवाला देकर काम नहीं किए जा रहे हैं। अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से शहरवासियों को परेशानी हो रही। महापौर की अधिकारियों पर पकड़ ही नहीं है। जनता पार्षदों से सवाल करने लगी हैं लेकिन उनके पास जवाब नहीं है।

कांग्रेस के वार्डों को छोडिय़े, भाजपा पार्षदों के वार्डों में ही काम नहीं हो रहे। नगर निगम में लगभग तीन वर्षों से कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो रहा है, दो वर्ष से निगम में जनप्रतिनिधियों का बोर्ड नहीं है तो किसी ने कोई प्रस्ताव नहीं दिए, शहर के आंतरिक मार्ग एवं नालियों, उद्यानों की समस्या विकराल है। मेंटेनेंस के अभाव में लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष राय का कहना है कि जब तीन वर्षों से कोई निर्माण नहीं हुए तो शासन से प्राप्त राशि एवं शहर उज्जैन से प्राप्त राजस्व आय की राशि कहां गई।

तीन वर्षों के कार्यों स्वीकृतियों, भुगतानों की जांच निगम महापौर एवं आयुक्त को करना चाहिए कि निगम का खजाना कैसे खाली हुआ। शहर के विकास को गति और जनहित के मूलभूत काम करने में असफल नगर निगम परिषद और महापौर बजट नहीं होने का हवाला देकर अपनी असफलता पर पर्दा डाल रहे हैं। शहर में सड़कों को चौड़ा करने की बात कहीं जा रही हंै। महापौर काम प्रारंभ करने से पहले यह तो बताएं कि करोड़ों की राशि कहां से आएगी।

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