598 करोड़ के प्रोजेक्ट पर संकट, नई योजना होगी तैयार

शिप्रा नदी का मैदानी जायजा लेगा प्रशासन
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अक्षरविश्व न्यूज . उज्जैन शिप्रा नदी को त्रिवेणी से रामघाट तक प्रदूषण रहित बनाने के लिए शिवराज सरकार के समय मंजूर 598 करोड़ 66 लाख के प्रोजेक्ट पर अब संकट दिखाई दे रहा है। सरकार नई योजना पर काम करने की तैयारी में है। सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासन नई योजना बनाने में जुट गया है। जल्द ही मैदानी जायजा लेकर एकीकृत योजना तैयार की जाएगी।

शिप्रा नदी के लिए सीएम डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन, इंदौर, देवास जिले के कलेक्टरों के साथ बैठक कर एक हफ्ते में ऐसी योजना बनाने का निर्देश दिया है, जिससे नदी में गंदे नाले न मिले और प्रदूषित न हो। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया इस सिलसिले में शिप्रा नदी का निरीक्षण कर एक हफ्ते में इंटीग्रेटेड योजना तैयार करेंगे। उन्होंने कहा डायवर्जन योजना सक्सेस नहीं है। सोमवार को उन्होंने टीएल मीटिंग में भी इस मुद्दे पर अधिकारियों से चर्चा की।
अभी टेंडर नहीं हुआ
कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना पर मुख्यालय में काम चल रहा है। इसका टेंडर जारी नहीं हो सका है।
कमल कुवाल,
कार्यपालन यंत्री जल संसाधन
अनिर्णय के भंवर में योजना
महंगे कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट से साधु संत और शहर के लोग भी सहमत नहीं हैं। शहर के लोग भी इसके पक्ष में नहीं हैं। जबकि पूर्व सरकार के समय 598 करोड़ की योजना का ठेका देने का काम अब भी चल रहा है। रविवार को सीएम द्वारा ली गई बैठक में भी इसका जिक्र नहीं हो सका। इस कारण प्रोजेक्ट पर अभी अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है इसको लेकर उच्च स्तर पर काम हो रहा है।
संत बोले ऐसा प्रोजेक्ट किस काम का…
वाल्मिकीधाम के संत बालयोगी उमेशनाथ ने कहा अगर करोड़ों रुपए खर्च कर खान नदी का प्रदूषित पानी वापस शिप्रा में ही छोडऩा है तो यह किस काम का। यह तो वैसा ही हुआ कि जहर के इंजेक्शन शरीर के एक अंग पर न लगाकर दूसरे अंग पर लगाना, जहर तो फैलेगा ही। उन्होंने कहा शिप्रा के लिए ऐसी योजना बने जो उपयोगी हो। केवल रामघाट पर ही फोकस न किया जाए, बल्कि पूरे शिप्रा नदी के बेल्ट पर ध्यान दिया जाए।










