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70 वर्षीय सरपंच ‘साहब’ का कमाल: भूख हड़ताल कर एक दिन में ही खुलवा दिया चार साल से बंद स्कूल

कलेक्टर ने तत्काल दो शिक्षकों की पदस्थापना की, अब नौनिहालों को नहीं जाना होगा पटरी पार कर अन्य स्कूल

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अगर मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो उम्र मायने नहीं रखती। ग्राम पंचायत उंडासा के ७० साल के सरपंच रमेशचंद्र शर्मा ने ऐसा ही कमाल कर दिखाया। जब गांव के नौनिहालों को रेल पटरी पार माधौपुरा पढऩे जाते देखा था तो गांव के चार से बंद स्कूल को शुरू करने की ठान ली और वे डीईओ ऑफिस में अकेले ही भूख हड़ताल पर बैठ गए। करीब ६ घंटे की हड़ताल का असर यह रहा कि कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने तत्काल दो शिक्षकों की पदस्थापना कर दी। जल्द ही स्कूल शुरू हो जाएगा और नौनिहालों को पढऩे के लिए दूसरी जगह नहीं जाना पड़ेगा।

नया सत्र होते ही जिले के सभी स्कूल खुल गए हैं। गर्मी की छुट्टियां बिताकर बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं। उंडासा के बच्चे शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण बेहद दुखी थे। यहां का स्कूल विगत ४ साल से बंद पड़ा है। नतीजतन इस गांव के स्कूल के बच्चों को माधौपुरा जाना पड़ा रहा है। यह स्कूल उंडासा से करीब ४-५ किलोमीटर दूर है। जिन बच्चों के पास साइकिल जैसा साधन नहीं है, उन्हें पैदल ही स्कूल की दूरी नापना पड़ती है। बीच में रेलवे क्रॉसिंग और तालाब भी है, बच्चे जान हथेली पर रखकर शिक्षा ग्रहण करने उस स्कूल में जाते हैं।

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उंडासा जनपद पंचायत के सरपंच रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि उंडासा के स्कूल पूर्व में शारदा शिक्षा समिति द्वारा संचालित किया जाता था। ४ साल पहले उस शिक्षा समिति को भंग कर दिया गया। परिणामस्वरूप वह स्कूल बंद हो गया। सरपंच का कहना है कि वे ४ साल से ही कलेक्टर, विधायक, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके है कि उंडासा के बच्चों के साथ न्याय किया जाए। पिछले साल शिक्षा विभाग ने अपने विभाग से कुछ कर्मचारियों को उंडासा भेजकर सर्वे कराया था। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यहां बहुत जल्द स्कूल प्रारंभ कर दिया जाएगा। ग्राम पंचायत उंडासा ने यहां तक कह दिया कि यदि विभाग स्कूल चालू करता है तो ग्राम पंचायत द्वारा भवन उपलब्ध करा दिया जाएगा। सरपंच ने कहा कि फर्नीचर और अन्य सामग्री की व्यवस्था वे अपने खर्च से कर देंगे। विभाग को सिर्फ स्टॉफ की व्यवस्था करना है।

डीपीसी ने की पहल: अनशन समाप्त करवाया
सोमवार को डीईओ ऑफिस में उनकी भूख हड़ताल शुरू हुई। जैसे ही इसकी खबर अफसरों को लगी तो हडक़ंप मच गया। जिला शिक्षा अधिकारी आनंद शर्मा के छुट्टी पर होने से डीपीसी गिरीश तिवारी ने समझाइश की कोशिश की। चर्चा का दौर शुरू हुआ और बात कलेक्टर रौशन कुमार ङ्क्षसह तक पहुंच गई। कलेक्टर ने समस्या को समझा और तत्काल ही एक्शन लेते हुए दो शिक्षिकाओं की पदस्थापना के निर्देश दिए। शिक्षिका राधा चौहान और उषा करोटिया उंडासा में पढ़ाने जाएंगी। आदेश के बाद नारियल पानी पिलाकर सरपंच का अनशन समाप्त करवाया गया।

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सरपंच बोले- स्कूल बंद होने से बेहद दुख होता था…
सरपंच ने चर्चा में बताया कि वे ७० वर्ष के हो गए है। वे भी उंडासा के माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते थे। स्कूल को देखकर बहुत खुशी होती थी, कि वे इस गांव के स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। अब स्कूल बंद होने से बेहद दुख होता है। सरपंच ने कहा कि वे प्रयास करते हुए थक गए हैं। अब कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में उन्होंने भूख हड़ताल करने का फैसला किया।

मामला मेरा संज्ञान में आया तो तत्काल बच्चों की समस्या को देखते हुए दो शिक्षिकाओं की पदस्थापना के निर्देश दिए हैं।
-रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर

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