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मकर संक्रांति: शिप्रा में स्नान के बाद दान-पुण्य

छतों से उड़ाई जमकर पतंग

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उज्जैन। मकर संक्रांति रविवार को भी मनाई जा रही है। शनिवार रात 8.50 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही संक्रांति संक्रमण काल शुरू हो गया। रविवार को सूर्योदय के साथ पर्व मनाया जा रहा है। सूर्य के राशि परिवर्तन से उत्तरायण प्रारंभ हो जाता है। यह जून-जुलाई तक रहता है।

महाकाल मंदिर में मकर संक्रांति पर्व पर तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को तिली से बना उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान कराया गया। भांग, सूखे मेवे से श्रृंगार कर नए वस्त्र और आभूषण धारण कराए गए। बाबा महाकाल को तिली से बने पकवानों का भोग लगाकर आरती गई।

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दान और स्नान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति के दिन तीर्थ स्थल पर स्नान के साथ दान आदि का महत्व है। सुबह तीर्थ स्नान और तिल से बने पकवान, कंबल, ऊनी वस्त्र, चावल-मूंग की दाल आदि वस्तुओं के दान का विशेष महत्व है। सुबह से रामघाट पर स्नान के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की गई। शिप्रा में नर्मदा का जल आने से दो पुण्य सलिला के जल में स्नान करने का लाभ भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण शहर में अधिक भीड़भाड़ रही। शहर के अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर दान-पुण्य किया गया। शहर में लोगों ने जमकर पतंगबाजी भी की।

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महाकाल मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

महाकालेश्वर मंदिर में रविवार को संक्रांति मानने वाले श्रद्धालुओं ने शिप्रा स्नान के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए। सुबह से ही मंदिर में बाहर के श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। अधिकारिेयों का कहना है कि पर्व के साथ ही शनिवार और रविवार अवकाश के दिन होने से बाहरी श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आ रहे हंै। यही कारण है कि रविवार को पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा हुआ नजर आया। मंदिर परिसर और बाहर लगे लड्डू प्रसाद के काउंटर पर लंबी कतार लगी हुई थी।

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