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अपने ही ‘बोल’ के ‘मोल’ में उलझ गए संत

हृदय परिवर्तन हो गया, बगावत का निर्णय टाल दिया

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अक्षरविश्व न्यूज . उज्जैन लगभग 20 दिन पहले भाजपा के सदस्य बने। उज्जैन दक्षिण से प्रत्याशी बनने के लिए दावेदारी की। टिकट नहीं मिला तो चार दिन पहले निर्दलीय मैदान में उतरने का ऐलान करने के साथ कई गंभीर आरोप भी लगा दिए। रविवार को अचानक हृदय परिवर्तन हो गया। भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी का साथ देने की घोषणा कर दी। बस क्या था अपने ही बोल में उलझ गए।

बात पहले उज्जैन दक्षिण से लम्बे-चौड़ वादे और कई गंभीर आरोपों के तीर चला कर निर्दलीय मैदान में उतरने की घोषणा कर बाद में चुनाव लडऩे से मुकरने वाले क्रांतिकारी संत डॉ.अवधेशपुरी महाराज की हो रही है। महाराज अपने हृदय परिवर्तन की जानकारी देने के लिए उज्जैन दक्षिण भाजपा के उम्मीदवार मोहन यादव के साथ मीडिया के सामने मुखतिब हुए। महाराज ने मैं चुनाव लड़ूगा तो हिंदुत्व विरोधी पार्टियों का फायदा होगा। मोहन जी से मेरा कोई विरोध नहीं है और न ही मैंने कभी उनसे कोई लड़ाई की है। मेरी शिकायत भारतीय जनता पार्टी से थी जिसे मैंने वरिष्ठों तक पहुंचाया था। इस दौरान आपने कहा कि अगर मैं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ता तो इसका सबसे अधिक लाभ उन विरोधी पार्टियों को होता जो कि धर्म पर आघात कर रही हैं।

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यू-टर्न की वजह नहीं बता पाए अवधेशपुरी महाराज

निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान करते वक्त किसी भी कीमत मैदान से पीछे नहीं हटने का दंभ भरने वाले क्रांतिकारी संत डॉ. अवधेशपुरी महाराज अपने हृदय परिवर्तन और यू-टर्न की सही वजह नहीं बता पाए। हद तो यह रही कि चुनाव लडऩे की घोषणा करते समय जिन मुद्दों, आरोपों को उठाया था, उन पर उठे सवालों का जवाब महाराज के पास नहीं था।

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दरअसल अवधेशपुरी महाराज ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी रावण की पूजा करने वाले और रामायण को जलाने वालों को टिकट दे सकती है। लेकिन हम जैसे संतों को विधानसभा चुनाव में मौका नहीं दिया जा रहा है। महाराज ने सप्त सागर और 84 महादेव का विकास, युवाओं व महिलाओं को रोजगार व किसानों को खाद बिजली व उपज का उचित मूल्य, नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क न्याय और नि:शुल्क चिकित्सा दिलाने का वादा भी किया था।

महाराज ने यह भी बताया था कि 30 अक्टूबर सोमवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने आधा दर्जन से अधिक महामंडलेश्वर व साधु संतों का आशीर्वाद और समर्थन होने की बात भी कही थी। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अवधेशपुरी महाराज ने कहा उनका चुनाव लडऩे का निर्णय पार्टी की नीति को लेकर था, जो मुद्दें उन्होंने उठाए थे उस पर चर्चा हो चुकी है। अब वह निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ेंगे बीजेपी के साथ हैं। भाजपा के साथ रहेंगे। महाराज का इतना कहना था कि मीडिया ने कई तरह के सवाल कर दिए। इस दौरान संत अवधेशपुरी महाराज किसी भी दे प्रश्न का जवाब नहीं दे पाए।प्रेस कॉन्फ्रेंस हंगामे की भेंट चढ़ गई।

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