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गेहूं और दाल को लेकर ब्लैक मार्केटिंग की आशंका, गड़बड़ी पर लेंगे एक्शन

सरकार पोर्टल पर दर्ज कराएगी स्टॉक का रिकॉर्ड

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:सरकार को आशंका है कि बरसात के दौरान गेहूं और दाल की ब्लैक मार्केटिंग की जा सकती है। इसके कारोबर पर नजर रखने के लिए सरकार ने जानकारी को पोर्टल पर दर्ज कराने का निर्णय लिया है। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका होने पर अधिकारी तत्काल कार्रवाई करने वाले है।

सरकार को आशंका है कि गेहूं और दाल की ब्लैक मार्केटिंग हो सकती है।, इसीलिए आम आदमी से जुड़ी खाद्य सामग्री की ब्लैक मार्केटिंग पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कलेक्टरों से कहा है कि वे अपने जिले में गेहूं, चावल, दाल व अन्य वस्तुओं कारोबार करने वाले से स्टॉक की जानकारी अपलोड कराएं।

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यह स्टॉक न सिर्फ प्रदेश सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण की निगरानी में रहेगा, बल्कि केंद्र सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग इसकी मॉनिटरिंग करेगा।इसको लेकर कलेक्टरों को दिए गए निर्देश में कहा है कि जिलों में हर व्यापारी को अपने स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य किया है ताकि बिग चेन रिटेलर्स और फुटकर व्यापारियों पर नियंत्रण किया जा सके। अगर कहीं गड़बड़ी होगी तो अधिकारी संबंधित व्यापारियों पर एक्शन ले सकेंगे।

शुक्रवार को जानकारी

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भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने गेहूं एवं दालों के व्यापारियों, थोक व्यापारियों, फुटकर विक्रेताओं, बिग चेन रिटेलर्स एवं फूड प्रोसेसिंग के लिए गेहूं तथा दाल के स्टॉक की घोषणा कराने का फैसला किया है। ऐसे कारोबारियों से गेहूं और दाल का स्टॉक पता करने के लिए एक स्टॉक पोर्टल तैयार किया है। इस पोर्टल पर व्यापारियों को हर शुक्रवार को गेहूं एवं दालों के स्टॉक की जानकारी अपलोड करनी होगी।

मसूर का स्टॉक भी बताना होगा

केंद्र सरकार के निर्देशों में कहा है कि गेहूं और दाल के साथ तुअर और उड़द पर स्टॉक सीमा तय किए जाने तथा तुअर और उड़द के साथ मसूर के स्टॉक की जमाखोरी को रोकने के लिए यह व्यवस्था तय की गई है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद प्रदेश में कलेक्टरों ने जिलों में इसको लेकर बैठकें करके अधिकारियों को स्टॉक सिस्टम सही कराने के लिए कहा है ताकि ब्लैक मार्केटिंग की स्थिति न बनने पाए। इसके लिए खाद्य विभाग और कृषि उपज मंडी के अधिकारियों को जिलों में रजिस्टर्ड व्यापारियों से भारत सरकार के पोर्टल में गेहूं एवं दालों के स्टॉक की घोषणा नियमित रूप से दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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