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नाममात्र के एडमिशन विक्रम विश्वविद्यालय में एक भी नहीं

उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू लेकिन चार वर्षीय ऑनर्स कोर्स की व्यवस्था तक नहीं

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उच्च शिक्षा विभाग ने बिना तैयारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर दी। इसका परिणाम है कि चार वर्षीय दो कोर्स,ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च में प्रवेश भर में नाममात्र के एडमिशन हुए है और विक्रम विवि में दोनों कोर्स में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है।

उच्च शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी किए बिना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर दी। अब इसके असर सामने आने लगे हैं। इस बार से मप्र में चार वर्षीय स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई है। चार वर्षीय दो कोर्स हैं, पहला ऑनर्स और दूसरा ऑनर्स विद रिसर्च। खास बात यह कि ऑनर्स विद रिसर्च में प्रदेशभर में महज 526 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया हैं। इनमें से विक्रम विवि में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। इसका बड़ा कारण यह है कि उच्च शिक्षा विभाग के साथ विवि और कॉलेज स्तर पर इसके लिए तैयारी ही नहीं थी। सत्र शुरू होने के 6 महीने पहले जमीनी तैयारी पूरी होनी थी, जो अब तक नहीं हो सकी है।

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न रिसर्च सेंटर ना ही गाइड

कॉलेजों में न रिसर्च सेंटर,ना ही गाइड और यूजी ऑनर्स विद रिसर्च शुरू कर दिया गया है।

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प्राइवेट कॉलेजों में रिसर्च सेंटर नहीं हैं, क्योंकि कॉलेजों में रेगुलर फैकल्टी ही नहीं होती। खासकर ऐसी फैकल्टी, जो रिसर्च गाइड बनने के लिए योग्य हो।

सरकारी कॉलेजों मे प्रोफेसर्स लगातार रिटायर हो रहे हैं। ऐेसे में वे अपने कॉलेजों में रिसर्च सेंटर नहीं बनाना चाहते हैं। कई रिसर्च गाइड के लिए योग्य हैं लेकिन वे गाइड भी नहीं बनना चाहते।

दो साल पहले से तैयारी करनी थी
शिक्षाविद् प्रो.नागेश शिंदे कहना है कि यह कोर्स ऑफर करने के लिए तैयारी नहीं थी। यूजीसी की शर्तें पूरी करने के लिए दो साल पहले से तैयारी की जानी चाहिए। कॉलेज ऑनर्स विद रिसर्च तभी ऑफर कर सकते हैं जब संबंधित विषय में उसके यहां रिसर्च सेंटर हो और दो रिसर्च गाइड हों। वहीं छात्र को तीन वर्ष में ओवरऑल 7.5 सीजीपीए होना चाहिए।

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