Advertisement

पार्किंग में वाहन खड़े करने से पहले हो जाएं सावधान… पर्ची पर लिखी शर्तें पढ़ें

कार्तिक मेला पार्किंग से युवक की बाइक चोरी

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। लोग पार्किंग में वाहन इसलिए खड़े करते हैं क्योंकि उन्हें भरोसा रहता है कि हमारा वाहन सुरक्षित है। यहां तोडफ़ोड़ या चोरी नहीं होगी, लेकिन कुछ चालाक पार्किंग ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर पर्ची पर छोटे अक्षरों में ऐसी शर्तें लिख रहे हैं जिसके बाद वाहन मालिक उसे जवाबदार नहीं ठहरा सकता।

नगर निगम द्वारा शिप्रा नदी के किनारे कार्तिक मेला लगाया गया है। मेले में सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। इस ओर आने वाले वाहनों को छोटा पुल, बड़ा पुल के पास पार्किंग में खड़ा कराया जा रहा है। नगर निगम ने इसका ठेका दिया है। ठेकेदार द्वारा एक माह चलने वाले मेले की पार्किंग में वाहन खड़े कराने के बाद पर्ची दी जा रही है। सामान्य तौर पर लोग शुल्क देकर पर्ची जेब में रख लेते हैं। उस पर लिखी शर्तें नहीं पढ़ते। ऐसे में यदि उनके वाहन में तोडफ़ोड़, कीमती सामान चोरी अथवा वाहन ही चोरी हो जाए तो पार्किंग संचालक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगा।

Advertisement

यह लिखा है पार्किंग की पर्ची में

कार्तिक मेला पार्किंग संचालक ने पर्ची में नगर पालिक निगम उज्जैन कार्तिक मेला वाहन पार्किंग बड़ा पुल लिखा है, जबकि इसे नगर निगम नहीं ठेकेदार संचालित कर रहा है। पर्ची पर दो पहिया वाहन पार्किंग शुल्क 20 रुपए लिखा है।

Advertisement

नीचे छोटे अक्षरों में तीन पाइंट हैं

1. कीमती व जोखिम भरे सामान की जवाबदारी हमारी नहीं होगी।

2. वाहन का बीमा न होने पर हमारी कोई जवाबदारी नहीं रहेगी।

3. यह टिकट केवल 6 घंटे तक मान्य रहेगी।

रात में बाइक खड़ी की, सुबह नहीं मिली

धन्नाखेड़ी घट्टिया में रहने वाला मनोहर पिता रतनलाल अपनी होंडा शाइन बाइक से रविवार को मेला देखने आया था। उसने नगर पालिक निगम उज्जैन कार्तिक मेला पार्किंग बड़ा पुल पर अपनी बाइक खड़ी की। पार्किंग संचालक ने उससे 10 रुपए शुल्क लिया और पर्ची थमा दी।

पर्ची लेकर मनोहर मेला घूमने गया। रात 10 बजे लौटा तो उसकी बाइक पार्किंग में खड़ी थी। रात अधिक होने के कारण मनोहर ने पार्किंग संचालक से कहा, मैं टीन शेड में सोने जा रहा हूं। संचालक बोला, सुबह अपनी बाइक उठा लेना तुम्हारे पास पर्ची है। यह सुनकर मनोहर सोने चला गया। सुबह 8 बजे वह पार्किंग में गया। यहां न तो उसकी बाइक थी और न ही कोई कर्मचारी था। उसने आसपास के लोगों से पूछताछ की। बाइक का सुराग नहीं मिलने पर महाकाल थाने पहुंचा। पुलिस को पर्ची दिखाई और शिकायत की।

Related Articles

Write a review