3 मीडियाकर्मियों के नाम चर्चा में थे दो सही निकले, रितेश को जेल भेजा

प्रथम चरण के अंतिम आरोपी ने यह नहीं बताया माल कितना कमाया…
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महाकाल पुलिस भी नहीं कर रही आरोपियों की संपत्ति और लेनदेन का खुलासा…
अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। महाकाल मंदिर में हुए भ्रष्टाचार की कहानी अब अफसरों तक सिमट कर रह गई है। प्रथम चरण का अंतिम आरोपी दो दिन की रिमांड पूरी होने के बाद अपने साथियों के पास जेल चला गया है। जाने से पहले उसने इतना जरूर किया कि कुछ नए नाम बता गया।
यह सभी लोग मंदिर में किस तरह भ्रष्टाचार का खेल करते थे, कितना पैसा कमाया, किसको कितना दिया यह बता कर नहीं गया। यदि बता भी दिया तो अभी महाकाल पुलिस ने इसका खुलासा नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि रितेश ने तीन मीडिया कर्मियों के नाम बताए थे। एक कम कैसे हो गया।
पुलिस की घोषणा से पहले जो दो नाम सोशल मीडिया की सुर्खियों में थे, वे सही निकले। अंतर केवल इतना है कि पुलिस ने नामों का खुलासा बाद में किया और नाम पहले आ गए। यदि यह दो नाम भी सही हैं तो तीसरा नाम पुलिस की फेहरिस्त से गायब क्यों हो गया? यदि पुलिस सही है और रितेश का बयान सही है तो सोशल मीडिया की जानकारी गलत थी। बहरहाल, कहानी लंबी है। राशि बड़ी है। अब देखना है कि पुलिस और अफसर यह कब बताते हैं कि इन सभी भ्रष्टाचारियों ने कितने रुपए कमाए।
भस्मार्ती प्रभारी रितेश शर्मा को महाकाल पुलिस उसके ठिकानों से खोज नहीं सकी। पुलिस सिर्फ दावे करती रही कि उसकी खोज की जा रही है। कांड उजागर होने के बाद से ही रितेश डरा हुआ था। उसे लगा कि मामला बड़ा है, पहले भी शिकायत होती थी। लोग शिकायत करते थे और पुलिस तथा कोर्ट के झंझट से मुक्ति पाने के लिए शिकायत वापस ले लेते थे। नतीजतन, बड़े मामले नहीं खुले। तत्कालीन अधिकारियों ने इन शिकायतों की जड़ में जाना उचित नहीं समझा।
रितेश को जब यह विश्वास हो गया कि पुलिस ज्यादा सख्ती पेश नहीं आ रही है, तब उसने सरेंडर किया। अक्षर विश्व ने उससे बात की। पूरा वृतांत बता कि वह फरार होने के बाद कहां-कहां गया। जब साथियों और हिस्सेदारों की बात आई तब उसने यही कहा कि नए नामों का खुलासा वह पुलिस के सामने ही करेगा। इधर मीडिया में नामों की चर्चा होने लगी। पहली बार मीडिया कर्मियों ने नाम उछले।
एफआईआर में हो गए 15 आरोपी
रितेश की गिरफ्तारी के बाद एफआईआर में अब 15 आरोपी हो गए हैं। पूर्व नंदी हॉल प्रभारी उमेश पंड्या यह मंदिर समिति का कर्मचारी है। आशीष शर्मा यह भी मंदिर समिति से जुड़ा हुआ है। क्रिस्टल कंपनी का सुपरवाइजर करण भी भ्रष्टाचारियों में शामिल हुआ। इनके अलावा मीडिया कर्मी विजयेंद्र यादव और पंकज शर्मा के नाम भी नए हैं। अभी इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
जनसंपर्क विभाग क्या कर रहा है
महाकाल मंदिर में प्रशासन ने जनसंपर्क अधिकारी बनाया है। बार-बार यही सवाल उठ रहे हैं कि इस अधिकारी के बारे में प्रशासन ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले दिनों टिप्पणी की कि महाकाल मंदिर पूरे देश के शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां की छोटी से खबर भी बड़ी बन कर पूरे देश में सुर्खियां बटोर लेती है। मीडिया को संयम बरतना चाहिए। आखिर बदनामी तो अपने शहर की ही होती है।
अधिकारी ने बिल्कुल सही टिप्पणी की। ऐसा नहीं होना चाहिए। अब इसकी जड़ में जनसंपर्क विभाग की लापरवाही को भी समझ लीजिए। यदि यह विभाग समाचार देने लगे और मीडिया के संपर्क में रहे तो उन खबरों पर विराम लग जाएगा जो अपुष्ट होती हैं। प्रदेश का जनसंपर्क विभाग जिस तरह काम करता है वैसे किया जाए। संयुक्त संचालक अरूण राठौर जिस तरह काम कर रहे हैं उसी पैटर्न पर महाकाल मंदिर का जनसंपर्क विभाग काम करे। प्रशासन चाहे तो उनके अनुभव और कार्यशैली का लाभ दिलाए। महाकाल मंदिर के जनसंपर्क विभाग की लापरवाही भी मंदिर समिति को भारी पड़ रही है।
क्या और नाम सामने आएंगे?
रितेश ने जिन नामों का उल्लेख किया है उनकी गिरफ्तारी बाकी है। सवाल यह है कि यह सभी नए आरोपी नए साथियों के नाम बताएंगे या खामोशी से जेल चले जाएंगे। फिलहाल, पुलिस को यह पता लगाना है कि कैमरा टांग कर महाकाल मंदिर की व्यवस्था में टंगड़ी फंसाने वाले किस तरह भ्रष्टाचार करते थे। इन लोगों ने रुपए कमाने के लिए महाकाल मंदिर में किससे सेटिंग की। क्या इन लोगों का होटल वालों से भी संबंध था?










