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वैध होने के बावजूद मकान मालिकों को प्रशासन नहीं दे रहा है मुआवजा

रविशंकर नगर में चौड़ीकरण का विरोध, रहवासियों ने पोस्टर लगाए

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। रविशंकर नगर (पत्रकार कॉलोनी) के बाशिंदो में चौड़ीकरण को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। यहां रहने वाले लोग शहर का विकास और सौंदर्य चाहते हैं लेकिन उनका मानना है कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन उस कॉलोनी के लोगों को मुआवजा देता है जिसके निर्माण, रजिस्ट्री और वैधता का कोई अता-पता नहीं है। रविशंकर नगर शहर की ऐसी कॉलोनी है जिसे योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया था।

१९७३ में इस कॉलोनी ने मूर्त रूप लिया। यह कॉलोनी पत्रकार गृह निर्माण सोसाइटी ने बसाई थी। इसका नेतृत्व कॉमरेड मानसिंह राही ने किया था। यहां पत्रकारों को भी प्लाट दिए गए। उसके बाद कॉलोनी विस्तारित हो गई। इसके बाद इंदौर गेट नगर सुधार न्यास ने योजना के तहत इसका सौंदर्यीकरण किया।

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कालांतर में प्राधिकरण का उद्भव हुआ। 1980 में यह कॉलोनी प्राधिकरण के अधीन हो गई। प्राधिकरण ने इसे वैधता प्रदान करते हुए नगर निगम के सुपुर्द कर दिया। नगर निगम तब से लेकर अब तक इस कॉलोनी में विकास कार्य करवा रही है। यहीं पर मानसिंह राही की स्मृति में उद्यान भी बनाया गया।

दोनों तरफ से 25 -25 फीट के मकान तोड़े जाएंगे

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प्रशासन इस मार्ग का चौड़ीकरण कर रहा है। फिलहाल यह सड़क 30 फीट चौड़ी है। योजना के अनुसार इस सड़कर को 8- फीट चौड़ा किया जाएगा। यदि कॉलोनी की बनावट देखे तो इंदौर गेट से जयसिंहपुरा की तरफ जाते हैं तो बांयी ओर जो मकान बने हुए हैं उनकी लंबाई 50 फीट है। जब सड़क चौड़ी करेंगे तो इन मकानों का 25 फीट भाग चौड़ीकरण में चला जाएगा। यानी मकान मालिकों के पास 25 फीट जगह ही बचेगी।

इसी प्रकार दांयी ओर की स्थिति देखे तो यहां के मकानों की लंबाई 30 फीट है। जब सड़की चौड़ी होगी और 25 फीट हिस्सा चला जाएगा तो इन मकानों का शेष भाग केवल 5 फीट ही बचेगी। सोचने वाली बात है कि इन मकानों में रहने वाले 5 फीट का क्या करेंगे। हालांकि प्रशासन ने एफएआर का विकल्प दिया है। इस विकल्प के तौर पर वे ऊपर तक निर्माण कर सकते हैं। मकानों के निर्माताओं का कहना है कि 5 फीट में कुछ भी नहीं बनाया जा सकता।

कृष्णा काकाणी का कहना है कि उन पर 1 करोड़ का कर्जा है। 6 महीने पहले ही मकान का रिनोवेशन किया था। वे बहुत परेशान है।

अनीता जैन का कहना है कि हम भरेपूरे परिवार को लेकर इस हालत में कहा जाएंगे। प्रशासन विचार करें।

चंदा अग्रवाल का कहना है कि अवैध कॉलोनी वालों को मुआवजा दे रहे हैं, हमने क्या बिगाड़ा है। प्रशासन हमारे साथ न्याय करें।

निशा कुलवाल का कहना है कि चौड़ीकरण के लिए इस इलाके में और भी विकल्प है, वहां करें।

मधुबाला ने कहा कि प्रशासन के इस निर्णय से हमारी रातों की नींद उड़ गई हैं। जीना मुहाल हो गया है। हम अब कहां जाएंगे।

पल्लवी जैन ने कहा कि हमारे पास कोई रोजगार नहीं है। शासन-प्रशासन दोनों अन्याय कर रहे हैं।

अलका मेहरा ने कहा कि हमने जिन-जिन को वोट दिए थे। सभी के दरवाजे पर गए किसी ने साथ नहीं दिया।

आरती कुलवाल ने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। हमें उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

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