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शराब बंदी से शहर में इतना जाम नहीं लगेगा

मन मोह लिया मोहन सरकार ने

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कानून व्यवस्था में भी अपेक्षित सुधार आएगा और सशक्त होगी पुलिस

शराबी सडक़ पर पड़े दिखाई नहीं देेंगे

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अहाते नहीं होंगे तो भीड़ भी नहीं रहेगी

पीना है तो शहर के बाहर जाना होगा

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बाबा काल भैरव की परंपरा कायम रहेगी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मोहन सरकार ने 17 धार्मिक शहरों में शराब बंदी का निर्णय लेकर लोगों का मन मोह लिया। यह पहली सरकार है जिसने लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने इरादों को अंजाम दिया। पूरे देश में इस निर्णय की चर्चा है। बाबा महाकाल के इस शहर में बंदी का खासा असर पड़ेगा। शहर के जागरुक लोगों में संशय है कि बंदी कैसे होगी? कहां बिकेगी? काल भैरव की परंपरा का क्या होगा? इन सभी सवालों के जवाब सरकार की नीति और निर्णय से ही निकले हैं।

शराब बंदी का स्वागत किया जा रहा है। भाजपा ने तो शुक्रवार को ही टॉवर चौक पर खुशी का इजहार कर दिया था। महेश्वर में कैबिनेट में शराब बंदी के निर्णय पर मुहर लगाई गई। अन्य कई जनोपयोगी निर्णय लिए, लेकिन सर्वाधिक सुर्खियों वाला निर्णय शराब बंदी ही रहा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश धीरे-धीरे शराब बंदी की ओर बढ़ रहा है। यह शुरूआत है। अभी धार्मिक शहरों के बारे में निर्णय लिया गया है। यह बंदी का पहला चरण है।

नगर निगम सीमा के बाहर
जो निर्णय हुआ उसके अनुसार शराब की दुकानें नगर निगम सीमा के बाहर रहेंगी। शहर के आंतरिक भाग में 17 दुकानें हैं जिनसे 233 करोड़ रुपए आय आबकारी विभाग को होती है। इंदौर गेट, कोयला फाटक नानाखेड़ा बस स्टैंड, महामृत्युंजय द्वार, नीलगंगा, गोपाल मंदिर पानी की टंकी, जयसिंहपुरा, केडी गेट, सांवेर रोड, फाजलपुरा, फ्रीगंज जीरो पाईंट, नागझीरी, दो तालाब, पांच नंबर नाका, एमआर-5 ओर पंवासा की दुकानें यहां से हट कर नगर निगम की सीमा से बाहर चली जाएंगी।

जाम से मुक्ति मिलेगी
शराब बंदी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जाम की समस्या झेलने वाला यह शहर कुछ हद तक इस समस्या से मुक्त हो जाएगा। दो तालाब के पास वाली शराब की दुकान का हाल पूरा शहर जानता है। इंदौर गेट के हाल किसी से छुपे नहीं हैं। पियक्कड़ों के कारण चार पहिया वाहन तो ठीक दो पहिया वाहन चालकों को भी समस्या से दो-चार होना पड़ता है। यही हाल फाजलपुरा के भी हैं। केडी गेट का रास्ता पहले ही संकरा है, शराबियों के कारण परेशानी औरबढ़ जाती है। इन मयखानों के यहां से हटने से जाम की समस्या से निजात मिलेगी।

सडक़ पर दर्शन नहीं होंगे
आमतौर पर देखा जाता है कि कई पीने वालों को चढ़ जाती है। नतीजतन, वे फैल हो जाते हैं। अहाते से उन्हें बेदखल कर दिया जाता है। चलने-फिरने लायक नहीं रहते। यहां-वहां गिर जाते हैं। कई बार तो नाली में ही पड़े रहते हैं। अहाते से निकलने वाले अपनी वाणी पर भी नियंत्रण नहीं पाते। आसपास से गुजरने वालों से उलझ पड़ते हैं और खानदान बखानने लगते हैं। कई दफा मारपीट की घटनाएं भी हुई हैं। शराब बंदी से इन लोगों से मुक्ति मिलेगी।

काल भैरव पर लगता रहेगा भोग
शरब बंदी के बाद यह चर्चा जोरो पर थी कि बाबा काल भैरव का क्या होगा? वहां परंपरा चली आ रही है। उसे बंद नहीं किया जा सकता। कई धर्माचार्यों और संतों ने कहा कि इस परंपरा का निर्वाह होते रहना चाहिए। यहां यह स्पष्ट कर दें कि बाबा को लगने वाला भोग बंद नहीं होगा। जिन्हें चढ़ाना है वे नगर निगम की सीमा के बाहर जाएं और शराब लेकर आएं। काल भैरव मंदिर परिसर में जो अधिकृत दुकान है वह रहेगी या नहीं। इसका निर्णय प्रशासन शासन की मंशा के अनुसार करेगा।

शराब पीकर हंगामा करने वालों की खैर नहीं
शहर की सीमा में शराब बंदी रहेगी। यदि किसी व्यक्ति ने शहर की सीमा में शराब पीकर हंगामा किया तो उसे पुलिस किसी भी कीमत पर बख्शेगी नहीं। शराब बंदी के नोटिफिकेशन के बाद पुलिस और सशक्त हो जाएगी। अभी तो समझाइश देकर रवाना कर दिया जाता है। शराब बंदी के बाद पुलिस अपने अधिकार का उपयोग करेगी।

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