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प्रेम कथा का अंत, दोनों ने जहर खाया था, प्रेमिका चल बसी थी, प्रेमी बच गया था

अंतत: राम ने भी घर में फांसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली, गांव में ही हुआ अंतिम संस्कार

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दोनों कॉलेज के जमाने से दोस्त थे

अलग-अलग जगह हो चुकी थी शादी

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अस्पताल से घर चला गया था राम

नागझिरी पुलिस जांच में जुटी थी

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। कॉलेज के जमाने से चली आ रही प्रेम कथा का अंतत: दुखद अंत हो गया। इधर प्रेमिका ने उज्जैन के चरक अस्पताल में दम तोड़ा और उधर प्रेमी ने उलाहनों से तंग आकर अपनी जीवन लीला भी समाप्त कर ली। इस घटना से एक साथ कई परिवारों का चमन उजड़ गया। प्रेमी शादीशुदा था और प्रेमिका की भी शादी हो चुकी थी। यानी दोनों ने दाम्पत्य जीवन की एक नई डगर पर चलने का संकल्प लिया था। इस संकल्प में वह दोनों पुराने वादों को नहीं भुला सके। नतीजा, न इसे जीवन की कोई खुशी मिल सकी और न उसके जीवन में खुशियों की बहार आई। दोनों अपनी यादों को अपने साथ ले गए और छोड़ गए परिवारों के लिए कभी न भुला पाने वाला हादसा। प्रेमी ने अपने गांव में फांसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। गांव में ही अंतिम संस्कार किया गया।

नागझिरी पुलिस चरक अस्पताल के उस प्रकरण की जांच कर रही थी जिसमें बताया गया था नागझिरी क्षेत्र में रहने वाले युवक-युवती ने पिछले शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात कहासुनी के बाद सल्फास खा लिया।

सुबह करीब 5:30 बजे युवती की मौत हो गई। अस्पताल से मिली सूचना के आधार पर पुलिस चरक पहुंची और जांच की तब पता चला कि 28 वर्षीय युवती का नाम हेमलता परमार है जो इंदिरानगर (नागझिरी) की रहने वाली है, जबकि युवक का नाम राममूर्ति पिता सुभाष पटेल है जो कल्पतरू एक्सटेंशन का रहने वाला है। राम के घर पर दोनों के बीच कुछ कहासुनी हुई। इसके चलते रात करीब ३ बजे दोनों ने सल्फास खा लिया। सुबह 5:30 बजे हेमलता की मौत हो गई।

डॉक्टर और नर्स को भी आश्चर्य हुआ था

हेमलता को देख कर वहां ड्यूटी पर तैनात डाक्टर और नर्सों को भी आश्चर्य हुआ था। उसनेे न मांग में सिंदूर लगाया था और न ही मंगलसूत्र पहना था। पैर में बिछिया और पायल भी नहीं थी। जानकारी मिलने के बाद सुबह दोनों के ही मिलने वाले अस्पताल पहुंचे थे और अफसोस जता रहे थे। उनका कहना था कि राम और हेमलता साइंस कॉलेज में पढ़ते थे। दोनों ही एक-दूसरे को चाहते थे। दोनों बीएससी किया। दोनों ही शादी करना चाहते थे, लेकिन किस्मत को शायद यह मंजूर नहीं था। हेमलता की राजगढ़ में शादी हो गई थी।

दोनों एक दूसरे को भूल नहीं सके

पुलिस ने बताया कि इस पूरे मामले में की गई जांच में यही बात निकल आई कि दोनों एक-दूसरे को भुला नहीं सके थे। दोनों की शादी हो चुकी थी। राम फाइनेंस का काम करता था। हेमलता के बारे में बताया कि वह ससुराल नहीं जा रही थी। तर्क था वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारी पूजा सोलंकी के अनुसार दोनों के मोबाइल जब्त कर लिए थे, लेकिन कुछ हासिल नहीं हो सका। राम ने मोबाइल फार्मेट कर दिए थे।

यही सवाल कौंध रहा था, राम बचा कैसे

पुलिस महकमें से लेकर हेमलता के परिवार में यही सवाल कौंध रहे थे कि दोनों ने सल्फास खाया, एक की मौत हो गई और दूसरे की जान कैसे बच गई। सल्फास के बारे में यह जग जाहिर है कि सल्फास का खाया हुआ व्यक्ति कभी बचता नहीं है। बताते हैं यह उलाहने राम को भी दिए गए। उसने अवंति अस्पताल से छुट्टी ली और घर चला गया। बताते हैं कि घर जाकर भी चैन की नींद नहीं सोया। उसे पुरानी यादें सताती रहीं और नए हालात के जख्म उसकी नींद को घायल करते रहे।

परिवार का आरोप, तनाव बढ़ा इधर हेमलता की मौत और राम के बचने के बाद हेमलता के परिवार ने आरोप लगाए कि उसे जहर देकर मारा गया। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से मिला। वह पूरे मामले से पर्दा उठाना चाहती थी कि आखिर इस घटना की सच्चाई क्या है? राम कैसे बच गया? क्या राम ने उसे जहर दिया? खुद ने कोई मामूली सा प्रभावहीन जहर निगला। यह सभी जांच के बिंदु थे। पुलिस की जांच अधूरी रह गई। जांच से पहले ही राम चला गया।

दोस्त दु:खी थे: राम ने अपने गांव स्थित घर में फांसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। कल सुबह उसका अंतिम संस्कार किया गया। अपने साथी को अंतिम बिदाई देने लिए उसके कॉलेज के जमाने के कई दोस्त वहां मौजूद थे। उन्होंने राम को लेकर बताया वह जिंदादिल इंसान था। कॉलेज में पहले साल में ही ऐसा लगने लगा कि सीनियर हो। अपने प्रिय साथी के इस तरह जाने से उसके दोस्त दु:खी थे।

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