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प्री-पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग सेंटर की ज्यादा जरूरत

राष्ट्रीय महिला आयोग सदस्य ने ली महिला अपराधों की रोकथाम समीक्षा बैठक

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राजा रघुवंशी हत्याकांड पर चिंता जताई, 80 स्थान पर शुरू हो चुके हैं सेंटर

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार की अध्यक्षता में प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में विभिन्न शासकीय योजनाओं में महिला लाभार्थियों की प्रगति और महिलाओं/बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

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मजूमदार ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जेल और सेवाधाम का भ्रमण किया। यह पाया गया कि घरेलू हिंसा को रोकने के लिए वृहद स्तर पर जागरुकता फैलाने की आवश्यकता है। हाल ही में इंदौर में हुए राजा हत्याकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्री-मैरिटल और पोस्ट-मैरिटल काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने की बहुत जरूरत है। वर्तमान में संपूर्ण देशभर में 80 स्थानों पर प्री-पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। जिनके द्वारा विवाह के 3 माह पहले से लेकर विवाह के 1 साल तक लडक़ा और लडक़ी की काउंसलिंग की जाती है।

निश्चित रूप से कार्रवाई होगी

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जिला पंचायत की सीईओ जयतिसिंह ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने समाज सुधार के लिए जो निर्देश दिए हैं उसके लिए निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। एएसपी पल्लवी शुक्ला ने महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए जिले में संचालित की जा रही गतिविधियों के बारे में मजूमदार को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जिले के 29 थानों में महिलाओं, बालिकाओं से संबंधित अपराधों में प्रथम केंद्र बिंदु के रूप में ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क स्थापित है। ऊर्जा महिला डेस्क में महिला पदस्थ अधिकारी फरियादी की समस्या की सुनवाई कर त्वरित निराकरण किया जाता है।

सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे
ऑपरेशन आई के तहत जिले के प्रत्येक थाना क्षेत्र को अधिकतम सीसीटीवी सर्विलांस के अंतर्गत लाया जा रहा है। असामाजिक तत्वों की हरकतों पर निगरानी कर कार्रवाई की जा रही है। मुख्य चौराहों, गलियों व मोहल्लों में व्यापारी संगठनों, पंचायतों के सहयोग से सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हंै। महिलाओं, बालिकाओं की सुरक्षा के लिए विद्यालय, महाविद्यालय, धार्मिक स्थान, गार्डन, सुनसान क्षेत्रों पर निर्भया निरंतर भ्रमण करवाई जाती है।

मानसिकता बदलने के लिए ठोस कदम उठाएं
महिला आयोग की राष्ट्रीय सदस्य ने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्य गिर रहे हैं, हम सबकी यह जिम्मेदारी बनती है कि इस प्रकार की मानसिकता को बदलने के लिए ठोस कदम उठाएं और दहेज प्रथा को पूर्ण रूप से बंद करने के लिए लोगों की मानसिकता को बदलकर इस कुप्रथा के प्रति अधिक से अधिक जागरुक करें।

बालिकाओं का स्कूल ड्रॉप आउट न हो
किशोरी, बालिकाओं के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बालिकाओं का स्कूल ड्रॉप आउट न हो, उन्हें सोशल मीडिया के कुप्रभाव से बचाया जाए। कानून द्वारा निर्धारित की गई उम्र में ही बालिकाओं का विवाह होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह न हो इसके लिए विशेष प्रयास किए जाएं। ग्रामीणों को समझाइश देकर जागरुक किया जाए। बालिकाओं को उच्च शिक्षा एवं कॅरियर के प्रति जागरूक किया जाए।

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