किसी को खुलकर नहीं बोल पाने की कसक तो किसी को पाठयक्रम में बदलाव की आस

79वां स्वतंत्रता दिवस: हर एक के लिए आजादी के मायने अलग
उज्जैन। भारत अपना ७९वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। उज्जैन भी आजादी के जश्न में डूबा है। शहर के हर बांशिदें के लिए आजादी के मायने अलग है। किसी को अभी भी खुलकर नहीं बोल पाने की कसक है तो कोई पाठयक्रम में अभी भी आक्रांताओं की मौजूदगी से हैरान है। कोई दो जून की रोटी में आजादी तलाश रहा है। अक्षरविश्व के रिपोर्टर पवन पाठक ने लोगों से आजादी के मायने जानने की कोशिश की। आइए जानते हैं
फ्रीगंज क्षेत्र में जनरल स्टोर्स का संचालन करने वाले व्यापारी रवि जैन कहते हैं कि हम अंग्रेजों से तो आजाद हो गए हैं लेकिन हम नेताओं से घिर गए हैं। हम आजाद तो हैं लेकिन खुलकर अभी भी नहीं बोल पाते।
12वीं के स्टूडेंट तनिष्क जाटवा कहते हैं कि हम अभी भी पूरी तरह आजाद नहीं हुए हैं। आज भी हमारे पाठयक्रमों में आक्रांताओं का जिक्र योद्धाओं की तरह होता है। हमें ऐसे पाठयक्रमों से आजादी चाहिए। छोटे बच्चों को भारी-भरकम स्कूली बैग से आजादी चाहिए।
दमदमा में काम कर रहे श्रमिक कालीचरण के लिए आजादी दो जून की रोटी है। वह कहते हैं हम आजाद तो हो गए लेकिन गरीबी से आजादी अभी तक नहीं मिली। हमारे लिए आजादी एक संघर्ष है और बच्चों की पढ़ाई एक सपना। हमें गरीबी से आजादी की दरकार है।
सा हित्यकार एवं शिक्षक डॉ. संजीवकुमार तिवारी कहते हैं कि आज स्वतंत्रता कोई स्वप्न नहीं, स्वप्न की सार्थकता है स्वतंत्रता के मायने निरकुंश आजादी नहीं, अनुशासन है,दायित्वबोध है, सृष्टि का विस्तार है, समरसता है, संकल्प की सिद्धि है। राष्ट का निर्माण ही स्वतंत्रता की वास्तविक उपादेयता है। स्वतंत्रता की कहानी रक्त से लिखी गई है, उस कहानी के शब्द पसीने के परिश्रम से जोड़े गए हैं। स्वतंत्रता निज तंत्र के साथ जीवन का नियमन भी है।









