मंदिरों का कायाकल्प सिंहस्थ के पहले करने की तैयारी…

दर्शन व्यवस्था, पार्किंग और होल्डिंग एरिया के लिए चिन्हांकन शुरू, शनि मंदिर के सामने खुलेगा बड़ा क्षेत्र
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उज्जैन। सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के सभी प्राचीन व प्रमुख मंदिरों का कायाकल्प करने की तैयारी हो गई है। बुधवार दोपहर सिंहस्थ मेला अधिकारी संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने जिले के प्रमुख मंदिरों का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने मंदिरों के पुनरुद्धार और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार हेतु व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

चिंतामण गणेश पर पार्किंग और धर्मशाला के लिए जगह चिह्नित: निरीक्षण की शुरुआत श्री चिंतामण गणेश मंदिर से हुई। यहाँ मेला अधिकारी ने श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए नई पार्किंग व्यवस्था, सुगम दर्शन कतार और आधुनिक धर्मशाला के लिए उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए।
शनि मंदिर पर 10 मीटर चौड़ा होगा मार्ग: त्रिवेणी स्थित श्री शनि मंदिर के निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मंदिर के सामने का एरिया पूरी तरह खुला रखा जाए, ताकि श्रद्धालुओं को भगवान के शिखर के दर्शन दूर से ही हो सकें। एडमिन ब्लॉक मंदिर के किनारे शिफ्ट किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए बड़ा होल्डिंग एरिया और पर्याप्त छांव की व्यवस्था होगी। मार्ग की चौड़ाई 10 मीटर से अधिक रखने और बड़ी पार्किंग सुविधा विकसित करने की
योजना है।
भूखी माता पर बनेगी यज्ञशाला और भंडारा स्थल
भूखी माता मंदिर के निरीक्षण में यज्ञशाला, भंडारा और बलि स्थल के लिए अलग और व्यवस्थित जगह बनाने के निर्देश दिए गए। यहाँ श्रद्धालुओं के लिए शौचालय और पार्किंग सुविधाओं के साथ-साथ पहुंच मार्ग को थोड़ा आगे से निर्मित करने की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इसके पश्चात अधिकारियों ने श्री हरसिद्धि माता मंदिर पहुँचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा सहित लोक निर्माण, राजस्व और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी साथ थे।
ड्रेनेज और फिसलन मुक्त पत्थरों पर फोकस
श्री सिद्धवट मंदिर के निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त श्री सिंह ने जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने को प्राथमिकता दी। मंदिर के पुनरुद्धार की योजना में ड्रेनेज सिस्टम को प्रमुखता से शामिल किया जाए। साथ ही, मंदिर परिसर के फ्लोर पर ऐसे पत्थरों का उपयोग करने को कहा गया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि मंदिरों में होने वाली विभिन्न प्रकार की पूजाओं, अनुष्ठानों और यज्ञों के लिए पर्याप्त और सुव्यवस्थित स्थान विकसित किए जाएं। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पार्किंग और होल्डिंग एरिया (श्रद्धालु विश्राम क्षेत्र) के लिए उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन किया गया।










