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मकर संक्रांति पर महासंयोग : सुबह संक्रांति का उल्लास, शाम को मनेगा श्री महाकाल महोत्सव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे महाकाल महालोक में शिवोहम नाद का शुभारंभ

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14 जनवरी को सर्वार्र्थ सिद्धि योग में मनेगा पर्व

 

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सूर्य के उत्तरायण होने का महापर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। इस दिन षटतिला एकादशी के साथ सर्वार्थसिद्धि व अमृतसिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। उज्जैन में इस अवसर पर भस्म आरती से लेकर संध्या काल तक उत्सव की धूम रहेगी। शाम को श्री महाकाल महालोक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों श्री महाकाल महोत्सव का भव्य शुभारंभ होगा, जिससे पूरा परिसर शिवोह्म के दिव्य नाद से गुंजायमान हो उठेगा।

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संक्रांति का 14 को प्रवेश 15 को स्नान-दान
पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3.08 बजे सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस बार संक्रांति पर षटतिला एकादशी होने से इसका आध्यात्मिक महत्व दोगुना हो गया है। विद्वानों के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्य संक्रमण के साथ दान-पुण्य शुरू होगा, जबकि उदय तिथि के मान से स्नान-दान का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। एकादशी होने के कारण श्रद्धालु खिचड़ी का दान तो कर सकेंगे, लेकिन चावल के सेवन से परहेज करेंगे।

सांदीपनि आश्रम व गोपाल मंदिर में भी होंगे धार्मिक आयोजन
भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम, गोपाल मंदिर और अन्य श्रीकृष्ण मंदिरों में भी मकर संक्रांति पर धार्मिक आयोजन होंगे। सांदीपनि आश्रम में भगवान का तिल मिश्रित जल से अभिषेक किया जाएगा और तिल के पकवान अर्पित किए जाएंगे।

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सूर्य साधना का केंद्र है अवंतिका
उज्जैन अनादिकाल से कालगणना और सूर्य साधना का केंद्र रहा है। मान्यता है कि 5000 साल पहले भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कालियादेह महल क्षेत्र में केसवार्क (केशवादित्य) सूर्य मंदिर की स्थापना की थी। इसी तरह अर्जुन ने शिप्रा तट पर नारादित्य मूर्ति की स्थापना की थी। इन दोनों प्राचीन मंदिरों में मकर संक्रांति पर विशेष पूजा का विधान है।

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