मकर संक्रांति पर शनि के द्वार पहुंचेंगे पिता सूर्य

नवग्रह शनि मंदिर में विशेष आयोजन, 111 धर्म ध्वजाओं के साथ निकलेगी सूर्य देव की सवारी
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मकर संक्रांति पर शिप्रा तट स्थित त्रिवेणी संगम पर पौराणिक श्री नवग्रह शनि मंदिर में पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) का मिलन होगा। साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटेंगे। यह आयोजन पारिवारिक संबंधों में मधुरता, सम्मान और संवाद का प्रतीक माना जा रहा है।

यह आयोजन इंदौर के आध्यात्मिक संत कृष्णा मिश्रा पिछले सात वर्षों से करते आ रहा हैं। कृष्णा गुरुजी ने बताया कि धर्मशास्त्रों के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी शुभ घड़ी में पिता-पुत्र के मिलन का अनुष्ठान होगा। दोपहर 2.45 बजे सूर्य देव की सवारी बटुक व ब्राह्मणों के साथ ढोल-ढमाके, झांझ और डमरू की मंगल ध्वनि के साथ निकलेगी। भगवान सूर्य पालकी में विराजमान होकर त्रिवेणी घाट पहुंचेंगे। त्रिवेणी घाट पर पूजन के पश्चात पालकी शनि मंदिर की ओर प्रस्थान करेगी। ठीक दोपहर 3.15 बजे मकर संक्रांति के क्षणों में सूर्य देव को शनि मंदिर के गर्भगृह में विराजित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
तिल-गुड़ से बढ़ेगी रिश्तों में मिठास: पं. मिश्रा के अनुसार, तिल शनि का और गुड़ सूर्य की प्रधानता वाला पदार्थ है। मकर संक्रांति पर जब पिता और पुत्र मिलकर तिल-गुड़ के पकवानों का सेवन करते हैं, तो उनके बीच परस्पर प्रेम और सम्मान बढ़ता है। इस महाआयोजन में भी भगवान को तिल-गुड़ का भोग लगाकर इसी परंपरा का संदेश दिया जाएगा।
विशेष पौधों का वितरण होगा
कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा) से लाई गई अर्क मिट्टी के साथ शनि की प्रतिनिधि वनस्पति शमी और सूर्य की प्रतिनिधि वनस्पति मदार के पौधों का वितरण किया जाएगा। सूर्य एवं शनि मंदिर के शिखर पर भव्य ध्वजा रोहण किया जाएगा। शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं के लिए फलाहारी खिचड़ी का वितरण किया जाएगा।
पिता-पुत्र की मधुरता का प्रतीक
मकर संक्रांति एक खगोलीय घटना के वक्त मनाते हैं। शास्त्रों में सूर्य और शनि की बनती नहीं है फिर भी साल में एक दिन वे एकसाथ रहते हैं। यह संदेश है समाज में पारिवारिक मधुरता का। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए पिता-पुत्र के संबंधों में मधुरता लाने का एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।
-कृष्णा गुरुजी, आयोजक










