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आरटीओ से पास हुई बसें अब अवैध कैसे?

बसों के पहिए थमे, बीच रास्ते फंसे हैं तीर्थ यात्रा पर गए सैकड़ो यात्री

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टूरिस्ट बस ऑपरेटरों ने बैठक में सरकार के पूछा सवाल, आंदोलन की रूपरेखा भी बनी

मनमानी : 7 जनवरी को बस का रजिस्ट्रेशन किया और 21 दिन बाद 29 जनवरी को कैंसिल कर दिया।

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। प्रदेश सरकार द्वारा 2/2 स्लीपर कोच बसों के संचालन पर अचानक लगाई गई रोक ने टूरिस्ट बस ऑपरेटरों और यात्रियों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। आरटीओ द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के रातों-रात बसों को पोर्टल पर ब्लॉक करने के विरोध में अब प्रदेशभर के बस ऑपरेटर लामबंद हो रहे हैं। शनिवार को उज्जैन में जुटे ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है वे सबसे पहले मुख्यमंत्री से गुहार लगाएंगे इसके बाद भी यदि राहत नहीं मिली तो तो प्रदेश व्यापी आंदोलन करेंगे और कोर्ट की शरण में जाएंगे।

टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल भावसार के अनुसार बैठक में सामने आया कि कई बसें वर्तमान में 40 से 50 दिनों की लंबी धार्मिक यात्राओं पर हैं। वर्तमान में कई गाडिय़ां कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खड़ी हैं। अचानक पोर्टल ब्लॉक होने से न केवल हजारों यात्री परेशान हो रहे हैं, बल्कि विवाह समारोहों के लिए बुक की गई बसों के निरस्त होने से आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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हजारों परिवारों पर आएगा आजीविका का संकट
ऑपरेटरों का सबसे बड़ा तर्क यह है कि ये सभी बसें उज्जैन आरटीओ से जांच और टैक्स भुगतान के बाद पास की गई थीं। जब सरकार ने ही इन्हें नियमों के तहत पंजीयन और संचालन की अनुमति दी थी तो अब अचानक इन्हें अवैध घोषित करना पूरी तरह अनैतिक है। इससे ड्राइवर, कंडक्टर और एजेंटों सहित हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट आ गया है।

7 दिन का अल्टीमेटम अव्यावहारिक
प्रशासन द्वारा 7 दिनों के भीतर 2/2 स्लीपर को 2/1 या 1/1 में बदलने के आदेश को ऑपरेटरों ने पूरी तरह अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि ये बसें विशेष रूप से मध्यम वर्ग की नर्मदा परिक्रमा, चारधाम यात्रा और बरात जैसे आयोजनों के लिए होती हैं। रातों-रात ढांचा बदलना न तो तकनीकी रूप से संभव है और न ही आर्थिक रूप से।

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