पंजाब के कपड़े यूरोप में बिकेंगे आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदला

पीएम मोदी ने संत निरंजन दास के पैर छुए, जालंधर के डेरा बल्लां में बोले
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जालंधर, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविदासिया समाज के जालंधर स्थित सबसे बड़े धार्मिक स्थल डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे। यहां पीएम मोदी ने संत निरंजन दास के पैर छूकर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा- मेरा रिश्ता संत रविदास जी की जन्मभूमि काशी से है। मैं पंजाब दी धरती नूं नमन करदा हां (मैं पंजाब की धरती को नमन करता हूं)। पीएम ने पेश हुए बजट में पंजाब को मिले लाभ का जिक्र किया। साथ ही यूरोपीय यूनियन के साथ हुई ट्रेड डील का जिक्र करते हुए कहा कि अब पंजाब में बने कपड़े और सामान यूरोप के बाजारों में बिकेगा।
पीएम मोदी ने रविदास की वाणी से 3 श्लोक पढ़े। काशी (वाराणसी), मध्यप्रदेश और पंजाब में संत रविदास की सेवा करने की बात दोहराई। रविदासिया समाज के साथ वाल्मीकि समाज को भी साधा। वाल्मीकि समाज को साधने के लिए अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर करने की बात बताई। वहीं, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डेरे के प्रबंधक ने कहा कि हम पीएम के आने से बहुत खुश हैं। पहली बार कोई प्रधानमंत्री हमारे बीच आया। इससे पहले पीएम दिल्ली से आदमपुर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उन्होंने पहले आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट, आदमपुर रखने का ऐलान किया। इसके बाद लुधियाना के हलवारा स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन किया।
मेरा रिश्ता संत रविदास की जन्मभूमि से- मोदी ने कहा आप सभी जानते हैं कि मेरा रिश्ता उस काशी से है, जो संत रविदास की जन्मभूमि है। काशी ने मुझे सेवा का मौका दिया। काशी के उन घाटों को मैंने छुआ है, जहां गुरु रविदास ने शिक्षा ली। यहीं से संत रविदास ने कहा था- मन चंगा तो कठौती में गंगा।
हमारी सरकार ने संत निरंजन दास को सम्मानित किया- संत श्री पीपल दास जी, संत श्री श्रवण दास जी के चलते गुरु रविदास के विचार जन-जन तक पहुंचे। मैं उन सब गुरुओं को भी प्रणाम करता हूं। समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े कार्य डेरा करता है। समाजसेवा के कई काम संत निरंजन दास की अगुआई में आगे बढ़ रहे हैं। इसी को देखते हुए उन्हें हमारी सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है।
संत रविदास ने कठिन समय में जन्म लिया
संतों ने हमेशा समानता की बात की है। इसी भावना को लेकर अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। संत रविदास के जन्म को 6 सदियां बीत गईं। तबसे अब तक भारत ने कितने हमले झेले। कठिन समय में काशी में संत रविदास का जन्म हुआ। उन्होंने समाज को झकझोरा। हमें सिखाया…एकौ माटी के सब भांडे (सब एक ही मिट्टी के बने हैं)।
विकसित भारत रविदास के विचार से निकला
गुरु रविदास ने बेगमपुरा बसाने की कल्पना की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसा शहर होना चाहिए जहां कोई दु:खी न हो, कोई वंचित न हो। मुझे संतोष है कि आजादी के इतने वक्त बाद देश अब मिशन मोड में संत रविदास के विचारों को लागू करने का काम कर रहा है। विकसित भारत संत रविदास जी के विचार से निकला है। उनके आशीर्वाद से हम विकसित भारत के मिशन को पाकर रहेंगे।









