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बैंड-बाजों के साथ आचार्यद्वय का मंगल प्रवेश, खाराकुआ तीर्थ पर उमड़ा जनसैलाब

उपाध्याय श्री अभ्युदय सागर जी की जन्म शताब्दी पर हुई गुणानुवाद सभा समाजजनों ने किया गुरुवंदन

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उज्जैन। श्री अभ्युदयपुरम गुरुकुल प्रणेता, मालव मार्तण्ड आचार्य देवेश श्री मुक्ति सागर सुरीश्वर जी, आचार्य रत्नकीर्ति सुरीश्वर जी एवं आचार्य श्री अचलमुक्ति सागर सूरी जी ससंघ का सोमवार सुबह अवंतिका नगरी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। घी मंडी स्थित कांच के जैन मंदिर से शुरू हुए इस प्रवेश जुलूस में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

जैन धर्म की ध्वजा और बैंड-बाजों की मधुर स्वर लहरियों के साथ शुरू हुए जुलूस में सैकड़ों समाजजनों ने गुरुदेव की अगवानी की। जुलूस का मुख्य आकर्षण सुसज्जित बग्गी पर गुरुदेव श्री अभ्युदय सागर सूरी जी महाराज का चित्र शोभायमान था। पारंपारिक और सजे-धजे परिधानों में महिला मंडल गुरु भक्ति के गीत गाते हुए चल रही थीं। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जब यह जुलूस निकला, तो जगह-जगह पुष्पवर्षा कर आचार्यश्री का स्वागत किया गया।

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गुणानुवाद सभा में गुरुदेव के योगदान को किया याद
प्रवेश जुलूस खाराकुआ स्थित श्री सिद्धचक्राधान केसरियारनाथ तीर्थ पहुंचा, जहाँ उपाध्याय प्रवर श्री अभ्युदय सागर सुरीश्वर जी महाराज की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने उनके द्वारा समाज को दिए गए अभूतपूर्व योगदान और उनके लोक कल्याणकारी कार्यों का स्मरण किया। इस अवसर पर समाज के नरेंद्र जैन दलाल, पारस हरणीया, संजय जैन खलीवाला, डॉ राहुल कटारिया, धर्मेंद्र जैन, अशोक हरणीया, प्रमोद जैन, संजय संघवी, ब्रजेश श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे।

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