सेहरा लुटाया, दोपहर में भूतभावन ने रमाई भस्म

महाकाल में महाशिवरात्रि : दोपहर तक 2 दिन में 7 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन, महोत्सव का आज समापन
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साल में एक बार दोपहर 12 बजे होने वाली भस्मार्ती देखने देशभर से पहुंचे दर्शनार्थी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भूतभावन भगवान महाकाल ने सोमवार को दोपहर में भस्म रमाई। फिर विधि विधान से भस्मार्ती की गई। इसी के साथ ही पिछले 10 दिनों से श्री महाकालेश्वर मंदिर में चल रहे महाशिवरात्रि महोत्सव का समापन हो गया। मंगलवार से भगवान महाकाल की दिनचर्या पूर्ववत हो जाएगी। महाशिवरात्रि को दिनभर दर्शन अभिषेक के बाद रात में चार पहर के पूजन का दौर प्रारंभ हुआ। रविवार रात 10.30 बजे से मंदिर में भगवान महाकालेश्वर का विशेष अनुष्ठान शुरू हुआ।
11 ब्राह्मणों द्वारा एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ के साथ देवादिदेव का अभिषेक किया गया। इस दौरान पांच प्रकार के फलों के रस और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से बाबा को स्नान करवाया गया। पूजन के बाद भगवान को नवीन वस्त्र और सप्तधान्य (चावल, मूंग, तिल, गेहूं, जौ, साल और उड़द) का मुखारविंद धारण करवाया गया।
3 क्विंटल फूलों से सजा बाबा का दिव्य सेहरा
सोमवार तड़के बाबा महाकाल को पुष्प मुकुट यानी सेहरा बांधा गया। लगभग 3 क्विंटल फूलों से भगवान का दिव्य शृंगार किया गया। सेहरे के साथ बाबा को चंद्र मुकुट, छत्र और त्रिपुंड जैसे आभूषणों से राजा स्वरूप में सजाया गया। सेहरा आरती के बाद भगवान को विभिन्न महाभोग अर्पित किए गए।
दर्शन के बाद लुटाया सेहरा
सोमवार सुबह से ही महाकाल मंदिर में आस्था का विशेष संगम देखने को मिला। सुबह श्रद्धालु भगवान महाकाल का बाबा महाकाल के दरबार में सेहरा दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह 11 बजे तक सेहरा दर्शन हुए। इसके बाद भगवान का सेहरा उतारा गया और उसमें से निकले फूल, पत्ती, फल, अनाज भक्तों के बीच लुटाया गया। मान्यता है कि भगवान का सेहरा घर में रखना शुभ माना जाता है।
भोग आरती दोपहर 2.30 बजे
आम दिनों में सुबह 11.30 बजे होने वाली भोग आरती सोमवार को भस्मारती के बाद 2.30 से 3 बजे के बीच होगी। इसके बाद शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा। इसके बाद ब्राह्मण भोज होगा
नवनिर्मित अन्नक्षेत्र में होगा ब्राह्मण भोज
भोग आरती के पश्चात श्री महाकालेश्वर नि:शुल्क अन्नक्षेत्र में ब्राह्मण भोज होगा। भोजन के उपरांत ब्राह्मणों को मंदिर समिति की ओर से दक्षिणा प्रदान की जाएगी। इसके बाद 18 फरवरी, बुधवार को वर्ष में एक बार होने वाले पंचमुखारविंद (पांच स्वरूपों के एक साथ दर्शन) के साथ इस भव्य महाशिवरात्रि पर्व का औपचारिक समापन होगा।
दोपहर 12 बजे से भस्मार्ती शुरू, हजारों श्रद्धालु पहुंचे
सु बह सेहरा दर्शन के बाद 11 बजे से सेहरा उतारकर भगवान महाकाल को निर्विकार स्वरूप मेें जलाभिषेक हुआ। इसके बाद भस्मार्ती की तैयारी हुई। साल में सिर्फ एक दिन महाशिवरात्रि के अगले दिन भगवान महाकाल की भस्मार्ती दोपहर 12 बजे होती है। दोपहर में होने वाली विशेष भस्मार्ती में शामिल होने के लिए कामना लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। हालांकि, दर्शन का मौका चंद किस्मतवालों को ही मिल पाता है। इस बार भी भस्मार्ती में करीब दो हजार लोग शामिल हुए। दोपहर ठीक 12 बजे भस्मार्ती शुरू हुई। जो दोपहर 2 बजे तक चलेगी।
महाकाल दरबार में नियमों पर भारी वीआईपी जनता कतार में, माननीयों ने तोड़ी मर्यादा
सांसद ने बैरिकेड्स से, बहन ने गर्भगृह से किए दर्शन
गर्भगृह की देहरी से दिनभर चले वीआईपी के दर्शन।
उज्जैन। महाशिवरात्रि पर महाकालेश्वर मंदिर में आस्था के दो रंग देखने को मिले। एक ओर वे आम श्रद्धालु थे जिन्होंने घंटों बैरिकेड्स में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया, वहीं दूसरी तरफ वे खास लोग थे जिनके लिए मंदिर के कड़े नियम और कोर्ट की बंदिशें बेअसर साबित हुईं। सवाल उठ रहा है कि जब आस्था सबकी एक है, तो नियम सिर्फ आम जनता के लिए क्यों?
जुलाई 2023 से गर्भगृह में आम भक्तों का प्रवेश बंद है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी इस व्यवस्था पर मुहर लगा चुके हैं लेकिन रविवार को सत्ता का रसूख इन बंदिशों को पार कर गया। सुबह भस्मार्ती से पहले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गर्भगृह में पहुंचकर जल चढ़ाया। दोपहर में तहसील पूजन के दौरान महापौर मुकेश टटवाल और सांसद अनिल फिरोजिया की बहन डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया भी बिना किसी आधिकारिक अनुमति के गर्भगृह में दाखिल हो गए।
हालांकि, सांसद अनिल फिरोजिया ने मंदिर के नियमों का मान रखा और प्रोटोकॉल छोड़कर आम आदमी की तरह बैरिकेड्स के पीछे कतार में खड़े होकर दर्शन किए। वीआईपी व्यवस्था और अधिकारियों की विशेष आवभगत पर उन्होंने आपत्ति भी जताई। इसके अलावा जल द्वार से प्रवेश कर गर्भगृह की देहरी से दिनभर दर्शन चले।
बड़ा सवाल अनुमति कहां है…?
हाल ही में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति देने का अधिकार सिर्फ कलेक्टर के पास है। ऐसे में बिना लिखित अनुमति के इन वीवीआईपी का प्रवेश न केवल मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि उन लाखों भक्तों की आस्था का भी मजाक उड़ाता है जो बाहर बैरिकेड्स से हाथ जोड़कर संतोष कर रहे हैं।









