उज्जैन में एमडी तैयार करने से पहले पकड़े गए तस्कर, फरवरी में मंगाया था केमिकल

म्याऊ-म्याऊ और ड्रोन के नाम से भी जाना जाता है मेफेड्रोन
गुजरात-महाराष्ट्र से उज्जैन मंगाते से घातक रसायन, झालावाड़ में 10 गुना दाम पर होता था सप्लाई
उज्जैन। चिमनगंज क्षेत्र में एमडी ड्रग्स बनाने का केमिकल झालावाड़ के बदमाशों को सप्लाई करने वाले आरोपी उज्जैन में भी ड्रग फैक्टरी शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। पर इससे पहले ही वह दबोच लिए गए। फरवरी से पुलिस इन पर नजर रख रही थी, और पुख्ता होने के बाद अप्रैल में कार्रवाई कर दी।
आरोपी ब्रोनोपोल और 2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपियोफिनोन जैसे घातक रसायन गुजरात और महाराष्ट्र से मात्र 5 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब से मंगवाते थे। इनका उपयोग वाहनों की पेंटिंग में होता है। फिलहाल वह कच्चा माल राजस्थान के झालावाड़ में 30 से 50 हजार रुपए प्रति किलो की दर से बेच रहे थे। झालावाड़ में रसायन का इस्तेमाल कर सिंथेटिक्स एमडी ड्रग्स बनाई जाती थी। एक ग्राम एमडी की कीमत करीब २ हजार रुपए होती है और इसकाा सबसे बड़े मार्केट राजस्थान के शहर उदयपुर, जयपुर, जोधपुर और मध्यप्रदेश का इंदौर है। यहां होने वाली बड़ी पार्टियों (खासकर युवाओं) में यह ड्रग मुंहमांगी कीमत पर बिकता है। १ ग्राम एमडी की कीमत करीब २ हजार रुपए होती है। तगड़ा मुनाफा देख आरोपी उज्जैन में भी फैक्टरी शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। मगर इससे पहले ही दबोच लिए गए। गौरतलब है कि मेफेड्रोन कृत्रिम उत्तेजक पदार्थ है जिसे बाजार में म्याऊ-म्याऊ और ड्रोन के नाम से भी जाना जाता है। इसके नशे की मदहोशी के कारण उपयोगकर्ताओं ने इसे यह नाम दिए हैं।
पांच दिन के रिमांड पर मुख्य आरोपी
शनिवार को मुख्य आरोपी अर्पित गुप्ता को कोर्ट में पेश किया गया। यहां से उसे 5 दिन के रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान आरोपी ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। उसने बताया कि अभी वह केमिकल सप्लाई कर रहा था, लेकिन जल्दी ही वह उज्जैन में एमडी बनाने की तैयारी कर रहा था।
दो को आज पेश करेंगे
मुख्य आरोपी अर्पित उर्फ सौरभ गुप्ता (निवासी- तिरुपतिधाम एक्सेंशन) के रिमांड पर आने के बाद पुलिस रविवार को रंजीत सिंह पिता करणसिंह (निवासी- गरोठ, मंदसौर) और ओमप्रकाश पिता घनश्याम शर्मा (निवासी- बड़ौद, आगर मालवा) को कोर्ट में पेश करेगी। यहां दोनों को रिमांड मांगा जाएगा।
11 मार्च को ही लगा है प्रतिबंध
एमडी में रसायनों का दुरुपयोग बढऩे के कारण सरकार ने 11 मार्च 2026को ही (2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपियोफिनोन) मेफेड्रोन केकिल के खुले उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इनका इस्तेमाल प्रमुख रूप से कॉस्मेटिक्स, रंगाई-पुताई, औद्योगिक प्रणालियों और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में दर्द निवारक दवाएं बनाने में होता है। यह सफेद और हल्के पीले रंग का क्रिस्टलीय पाउडर है, जो अब ड्रग्स माफिया की पसंद बन गया है। मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत एक अधिसूचना जारी कर एनडीपीएस (नियंत्रित पदार्थों का विनियमन) आदेश, 2013 में संशोधन किया और रसायन 2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपियोफेनोन को नियंत्रित पदार्थों की सूची में शामिल किया। ११ मार्च २०२६ को इस पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया गया।
बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या
थाना प्रभारी गजेंद्र पचोरिया के अनुसार पूछताछ में बड़े ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों के बड़े तस्करों से जुड़े हो सकते हैं, जिससे मामले में गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
फैक्टरी शुरू करने की तैयारी में थे
मुख्य आरोपी अर्पित उज्जैन में एमडी बनाने की तैयारी कर रहा था। फरवरी से उस पर निगाह रखी जा रही थी। पुख्ता सबूत मिलने पर कार्रवाई की गई। अभी आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है।
प्रदीप शर्मा, एसपी उज्जैन









