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भारत टैक्सी का तेजी से विस्तार, 35 लाख यूजर्स और 6 लाख ड्राइवर जुड़े, जानें पूरा मॉडल

देश के कैब और ऑटो सेवा क्षेत्र में एक नई हलचल मच गई है। एक ऐसा मंच तेजी से पांव पसार रहा है जहां ड्राइवर खुद मालिक हैं और यात्रियों को भी सस्ता सफर मिल रहा है। भारत टैक्सी नाम के इस मोबिलिटी प्लेटफॉर्म से अब तक 35 लाख से अधिक यात्री और छह लाख से ज्यादा चालक जुड़ चुके हैं। कंपनी का दावा है कि उसका जीरो-कमीशन मॉडल ड्राइवरों की कमाई बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों की जेब पर भी बोझ कम कर रहा है।

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कैसे काम करता है यह अनोखा मॉडल

भारत टैक्सी को इसी साल 5 फरवरी 2026 को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के सामने पेश किया था। यह प्लेटफॉर्म एक सहकारी यानी कोऑपरेटिव ढांचे पर चलता है जिसमें चालकों को महज कर्मचारी नहीं बल्कि हिस्सेदार माना जाता है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भी तरह का कॉर्पोरेट कमीशन नहीं काटा जाता और राइड का पूरा भुगतान सीधे ड्राइवर के बैंक खाते में पहुंचता है।

ड्राइवरों की जेब में आ रहे ज्यादा पैसे

भारत टैक्सी का कहना है कि उससे जुड़े चालकों की मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। पुराने एग्रीगेटर मॉडल में भारी कमीशन कटौती और अनिश्चित आय ड्राइवरों की सबसे बड़ी समस्या थी। इस नए ढांचे ने उन्हीं समस्याओं को जड़ से खत्म करने की कोशिश की है और नतीजे बेहद उत्साहजनक दिख रहे हैं।

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यात्रियों को भी मिल रहा सस्ता सफर

इस मॉडल का फायदा केवल ड्राइवरों तक सीमित नहीं है। यात्रियों को भी दूसरी राइड सेवाओं के मुकाबले औसतन 15 प्रतिशत कम किराया चुकाना पड़ रहा है। जहां अन्य कंपनियां करीब 30 रुपये प्रति किलोमीटर वसूलती हैं वहीं भारत टैक्सी महज 17 से 18 रुपये प्रति किलोमीटर ले रही है। यह फर्क आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है।

चालक ही मालिक, यही है असली ताकत

अमूल के प्रबंध निदेशक और भारत टैक्सी के अध्यक्ष जयेन मेहता ने इसे तकनीक से संचालित सहकारिता का एक मजबूत उदाहरण बताया। उनका कहना है कि इस मॉडल में राइड से होने वाली पूरी कमाई बिना किसी कटौती के सीधे ड्राइवर तक पहुंचती है। उनके अनुसार यह प्लेटफॉर्म दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी सहकारी संस्था के रूप में उभर रहा है।

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ड्राइवर खुद क्या कह रहे हैं

प्लेटफॉर्म से जुड़े चालकों ने माना कि दूसरी कंपनियों के साथ काम करना अब उतना फायदेमंद नहीं रहा था लेकिन इस नए मंच पर बेहतर कमाई और अच्छा अनुभव मिल रहा है। एक अन्य चालक ने कहा कि यहां वे खुद को असली मालिक जैसा महसूस करते हैं क्योंकि न तो कमीशन कटता है और न ही पैसों के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं भी मिलने की उम्मीद है।

गुजरात में जड़ें मजबूत, नए शहरों की तैयारी

कंपनी के एक लाख से अधिक ड्राइवर अकेले गुजरात में हैं। अहमदाबाद और सूरत में सफलता के बाद अब वडोदरा में भी सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। आईटी पार्क, हवाई अड्डे और आवासीय सोसाइटियों जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर सीधे संपर्क अभियान के जरिए यात्रियों और ड्राइवरों को जोड़ा जा रहा है। एप पर दस्तावेज जमा करने के महज 12 घंटे के भीतर ड्राइवरों को मंजूरी मिल जाती है जो इसे और भी आसान बनाता है।

सुरक्षा, प्रशिक्षण और आगे की राह

यात्रियों और चालकों की सुरक्षा को लेकर भारत टैक्सी ने अपने आपातकालीन SOS सिस्टम को गुजरात पुलिस से जोड़ा है। सोमनाथ और द्वारका जैसे धार्मिक स्थलों के लिए भी खास रूट कनेक्टिविटी शुरू की गई है। अब तक दस हजार से ज्यादा ड्राइवरों को डिजिटल साक्षरता, एप उपयोग और व्यवहार कौशल की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। आगे कंपनी मेट्रो सेवाओं, सरकारी बस सेवा और हवाई अड्डा अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे परिवहन नेटवर्क को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है।

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