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कार प्लांट ऑटोमेशन, 1000 कर्मचारियों की नौकरी पर चली गई

वैश्विक ऑटोमोबाइल जगत की दिग्गज अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स (General मोटर्स – GM) ने अपनी उत्पादन लागत को कम करने और मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने मिशिगन स्थित अपने मशहूर ‘फैक्ट्री जीरो’ (Factory Zero) असेंबली प्लांट में 50 नए आधुनिक रोबोट्स को तैनात किया है।

 

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हालांकि, उत्पादन लाइन में मशीनों के इस दखल का खामियाजा इंसानों को भुगतना पड़ा है। इन रोबोट्स की एंट्री के साथ ही जनरल मोटर्स ने इसी प्लांट से 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से टर्मिनेट (बाहर) कर दिया है। लगातार हो रही इन छंटनियों और ऑटोमेशन के चलते कंपनी और मजदूर यूनियनों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है।

क्या हैं ‘कोबोट्स’ और क्या है इनका काम?

ऑटोब्लॉग की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में तैनात किए गए इन रोबोट्स को तकनीकी भाषा में ‘कोबोट्स’ (Collaborative Bots) कहा जाता है।

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  • इंसानों के साथ तालमेल: इन कोबोट्स का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि ये प्रोडक्शन लाइन पर इंसानों के साथ मिलकर काम कर सकें।

  • कठिन काम आसान: वर्तमान में ये रोबोट वाहनों के भारी बॉडी पैनल्स को पूरी सटीकता के साथ फिट करने जैसे अत्यधिक वजन वाले और जटिल तकनीकी कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

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जनरल मोटर्स का दावा: “नौकरियां छीनना मकसद नहीं”

एक साथ 1,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने पर चौतरफा घिरी जनरल मोटर्स ने अपनी सफाई में तकनीकी आधुनिकीकरण का तर्क दिया है:

  • सुरक्षा का हवाला: जीएम के आधिकारिक प्रवक्ता केविन केली ने बताया कि कोबोट्स को कर्मचारियों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा और सहूलियत को बेहतर बनाने के लिए लाया गया है।

  • अस्थायी छंटनी की दलील: कंपनी का दावा है कि प्रभावित कर्मचारियों की यह छंटनी पूरी तरह से ‘अस्थायी’ (Temporary) है। हालांकि, गंभीर बात यह है कि इन निकाले गए मजदूरों को वापस काम पर कब बुलाया जाएगा, इसे लेकर प्रबंधन ने कोई समयसीमा या स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की है।

यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स (UAW) का फूटा गुस्सा

मशीनीकरण के इस फैसले का विरोध करते हुए अमेरिका की सबसे ताकतवर मजदूर संगठन ‘यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स’ (UAW) ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका साफ आरोप है कि एआई (AI) और ऑटोमेशन की आड़ में गरीब मजदूरों का हक मारा जा रहा है।

  • मजदूरों की निराशा: UAW लोकल 22 के अध्यक्ष जेम्स कॉटन ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हमसे हमारी मैनपावर (मानव श्रम) को छीना जा रहा है। प्लांट के भीतर इंसानों की जगह इन कोबोट्स को काम करते देखना हमारे कार्यबल के लिए बेहद निराशाजनक है।”

  • शॉन फेन का कड़ा रुख: UAW के राष्ट्रीय अध्यक्ष शॉन फेन ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘इंसानियत और कॉर्पोरेट लालच की जंग’ करार दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “आज मजदूर पहले से कहीं अधिक उत्पादकता दे रहे हैं, लेकिन इसका फायदा उन्हें मिलने के बजाय बेरोजगार करके दिया जा रहा है। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ नौकरियां निगलने के लिए होगा, तो हमें इसे हर हाल में रोकना होगा।”

पहले भी कई इंजीनियरों पर गिर चुकी है गाज

जनरल मोटर्स में मैनपावर को घटाने और नई तकनीक को अपनाने का यह सिलसिला पिछले काफी समय से जारी है:

  • मई में बड़ी कार्रवाई: कंपनी ने अपने कोर आईटी (IT) डिपार्टमेंट से करीब 600 से ज्यादा योग्य इंजीनियरों को नौकरी से निकाल दिया था, जो उनके कुल आईटी वर्कफोर्स का 10% था।

  • अक्टूबर 2025 का एक्शन: इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी जीएम ने 200 से अधिक कंप्यूटर-एडेड डिजाइन (CAD) इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं।

विशेषज्ञों का विश्लेषण: टेक और ऑटो एक्सपर्ट्स इस प्रक्रिया को ‘स्किल्स स्वैप’ (Skills Swap) कह रहे हैं। इसके तहत कंपनियां पुराने और पारंपरिक तकनीकी रोल्स को पूरी तरह खत्म करके उस बजट को एआई, कोडिंग और रोबोटिक्स में री-इन्वेस्ट कर रही हैं।

कमाई में बंपर उछाल, फिर भी छंटनी क्यों?

हैरानी की बात यह है कि जनरल मोटर्स वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की सुस्त मांग और इसके चलते प्लांट में कई बार आए ‘प्रोडक्शन हॉल्ट’ (काम रुकने) जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। इसके बावजूद, कंपनी वित्तीय रूप से बेहद मजबूत स्थिति में है। साल 2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) में जीएम ने 4.25 अरब डॉलर का शुद्ध मुनाफा कमाया है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 22% अधिक है। ऐसे में रिकॉर्ड मुनाफे के बीच इतनी बड़ी छंटनी ने कॉरपोरेट नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भविष्य के संकेत: 2028 में बड़े टकराव के आसार

यह विवाद सिर्फ मिशिगन प्लांट तक सीमित रहने वाला नहीं है। ऑटो इंडस्ट्री के विश्लेषकों का मानना है कि साल 2028 में जब वाहन निर्माता कंपनियों और मजदूर संगठनों के बीच नए कलेक्टिव बारगेनिंग एग्रीमेंट (श्रमिक समझौते) पर हस्ताक्षर होने होंगे, तब फैक्ट्रियों में एआई का दखल और रोबोट्स का इस्तेमाल सबसे विवादित और मुख्य मुद्दा बनकर उभरेगा।

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