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कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? दिलजीत की ‘सतलुज’ क्यों हुई भारत में बैन

कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? जानें दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ क्यों हुई भारत में बैन

Satluj Ban Controversy: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा में है। चार साल तक सेंसर संबंधी विवादों का सामना करने के बाद फिल्म 3 जुलाई 2026 को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन महज 48 घंटे के भीतर भारत में इसे हटा दिया गया। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल उठने लगा कि आखिर जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे, जिनकी जिंदगी पर बनी यह फिल्म लगातार विवादों में बनी हुई है।

 

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कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?

जसवंत सिंह खालड़ा का जन्म 2 नवंबर 1952 को पंजाब के तरनतारन जिले के खालड़ा गांव में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बैंक कर्मचारी के रूप में की थी, लेकिन बाद में मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में पहचान बनाई।

1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद और पुलिस अभियानों के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वे पंजाब ह्यूमन राइट्स संगठन से जुड़े और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने के लिए काम किया।

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क्यों चर्चा में आए थे जसवंत सिंह खालड़ा?

जसवंत सिंह खालड़ा ने नगर निगम और श्मशान घाटों के रिकॉर्ड की जांच कर दावा किया था कि बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनकी पहचान दर्ज नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ों के बाद “अनक्लेम्ड” बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

उनके इन दावों ने देश और विदेश में व्यापक बहस छेड़ दी और मामला अदालत तक पहुंचा।

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कैसे हुई थी जसवंत सिंह खालड़ा की मौत?

6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित उनके घर के बाहर से उनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। इसके बाद वह कभी जीवित नहीं मिले।

मामले की जांच CBI को सौंपी गई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कई पुलिस अधिकारियों को अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषियों की सजा बरकरार रखी।

‘Punjab 95’ से ‘सतलुज’ तक का सफर

निर्देशक हनी त्रेहान ने जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर फिल्म बनाई, जिसका शुरुआती नाम ‘Punjab 95’ था। फिल्म में मुख्य भूमिका दिलजीत दोसांझ ने निभाई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई बदलाव और बड़ी संख्या में कट लगाने का सुझाव दिया। विवाद बढ़ने के बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया।

भारत में ‘सतलुज’ क्यों हुई बैन?

करीब चार साल तक रिलीज अटकी रहने के बाद फिल्म 3 जुलाई 2026 को ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा और विषय की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए फिल्म हटाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा?

फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को सामने लाने का प्रयास है। वहीं निर्देशक हनी त्रेहान ने भी बताया कि फिल्म को सीमित प्रचार के साथ रिलीज किया गया था, लेकिन जल्द ही इसे हटा दिया गया।

क्यों जारी है विवाद?

‘सतलुज’ पंजाब के उस दौर की घटनाओं को दिखाती है, जिसे आज भी संवेदनशील माना जाता है।

  • समर्थकों का कहना है कि यह मानवाधिकारों की लड़ाई की कहानी है।
  • विरोध करने वालों का मानना है कि इससे पुराने विवाद फिर उभर सकते हैं।

इसी वजह से फिल्म रिलीज के बाद भी लगातार चर्चा और विवाद का विषय बनी हुई है।

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