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Teachers Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस?

भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वहीं, दुनिया में विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में शिक्षक दिवस के लिए 5 सितंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई? इसके पीछे देश के महान शिक्षाविद, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से जुड़ी खास वजह है।

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शिक्षक हमारे जीवन में सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि हमें सही और गलत की समझ, आत्मविश्वास और जीवन में आगे बढ़ने की दिशा भी दिखाते हैं। तो आइए जानते हैं शिक्षक दिवस का महत्व और इस खास दिन से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें।

1.भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के महान शिक्षाविद, दार्शनिक और भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।

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2.डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे आंध्र विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति भी रह चुके थे।

3.भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है, जबकि विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। दोनों दिन शिक्षकों के योगदान और शिक्षा के महत्व को सम्मान देने के लिए समर्पित हैं।

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4.भारत में पहली बार 1962 में शिक्षक दिवस मनाया गया था। इसके बाद से हर साल 5 सितंबर को शिक्षकों के सम्मान में यह दिन मनाने की परंपरा जारी है।

5.डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नोबेल साहित्य पुरस्कार और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कई बार नामांकित किया गया था। भारतीय दर्शन और शिक्षा को दुनिया तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

6.जब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कुछ अनुयायियों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो डॉ. राधाकृष्णन ने अपना जन्मदिन मनाने के बजाय इस दिन को शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया।

7.शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। यह उनके योगदान और समर्पण को सम्मान देने का एक माध्यम है।

8.शिक्षक दिवस हमें याद दिलाता है कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करते हैं। अच्छी शिक्षा देश की आने वाली पीढ़ी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

9.भारतीय संस्कृति में गुरु को हमेशा विशेष सम्मान दिया गया है। संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः” गुरु की महत्ता और उनके विशेष स्थान को दर्शाता है।

10.प्राचीन भारत में शिक्षकों को ‘गुरु’ कहा जाता था और गुरु-शिष्य परंपरा शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। गुरु विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ जीवन के संस्कार, अनुशासन और सही मूल्यों की सीख भी देते थे।

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